
सुसनेर, सुसनेर विधानसभा क्षेत्र के ग्राम मगीशपुर में बुनियादी सुविधाओं के अभाव की एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने ग्रामीण विकास के दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं. शक्रवार सुबह करीब 10.30 बजे सामने आए वीडियो में ग्रामीणों को अंतिम संस्कार के लिए शव को घुटनों तक भरे पानी और कीचड़ से निकालकर श्मशान घाट तक ले जाते हुए देखा गया. यह दृश्य गांव में श्मशान तक जाने के लिए पक्के मार्ग की कमी को उजागर करता है.
ग्रामीणों का कहना है कि श्मशान तक पहुंचने का रास्ता वर्षों से कच्चा है. बारिश होते ही यह मार्ग पूरी तरह कीचड़ और पानी से भर जाता है, जिससे अंतिम यात्रा निकालना भी बेहद कठिन हो जाता है. लोगों को मजबूरी में पानी और दलदल से होकर गुजरना पड़ता है. जिससे बुजुर्गों को और अंतिम यात्रा में शामिल अन्य लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है.
ग्रामीणों ने की जिम्मेदारो से मांग
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और संबंधित जनप्रतिनिधियों से मांग की है कि मगीशपुर श्मशान घाट तक शीघ्र पक्का सीसी मार्ग बनाया जाए, ताकि भविष्य में किसी भी परिवार को अपने परिजनों की अंतिम यात्रा के दौरान ऐसी कठिन परिस्थितियों का सामना न करना पड़े. अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर मगीशपुर के ग्रामीणों को श्मशान तक सम्मानजनक रास्ता कब मिलेगा और प्रशासन इस गंभीर समस्या का समाधान कब करेगा.
सबसे लगाई गुहार, अब तक नहीं निकला हल
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार कई बार जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों के समक्ष श्मशान मार्ग निर्माण की मांग रखी जा चुकी है, लेकिन आज तक कोई स्थायी समाधान नहीं हो पाया. हर वर्ष बारिश के मौसम में यही स्थिति बनती है और गांव के लोगों को अपमानजनक परिस्थितियों में अपने परिजनों का अंतिम संस्कार करने के लिए विवश होना पड़ता है. ग्रामीणों का कहना है कि सरकार गांवों में सडक़, नाली और अन्य विकास कार्यों के बड़े बड़े दावे करती है, लेकिन जब श्मशान जैसे महत्वपूर्ण स्थान तक जाने के लिए भी पक्का रास्ता उपलब्ध नहीं है तो विकास के दावों पर सवाल उठना स्वाभाविक है. उनका कहना है कि अंतिम यात्रा जैसी संवेदनशील परिस्थिति में भी लोगों को कीचड़ और पानी से होकर गुजरना पड़े, इससे बड़ी विडंबना और क्या हो सकती है.
