खंडवा:स्वास्थ्य सुविधाओं के नाम पर सिस्टम कितनी बड़ी धोखाधड़ी कर रहा है, इसकी जीती-जागती मिसाल जिले की सिंगोट तहसील का ग्राम पंचायत हीरापुर है। यहाँ का आयुष्मान आरोग्य मंदिर उप-स्वास्थ्य केंद्र प्रशासनिक और विभागीय भ्रष्टाचार के चलते अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। हल्की बारिश में ही अस्पताल की छत छलनी हो चुकी है और पूरा परिसर जलमग्न होकर तालाब में तब्दील हो गया है। हालात इतने बद्तर हैं कि डॉक्टर और स्टाफ के बैठने की कुर्सियां और टेबल भी बारिश के पानी से पूरी तरह भीग चुके हैं। मरीज इलाज के लिए आएं तो कहां बैठें, यह एक बड़ा सवाल बन गया है।
स्वास्थ्य केंद्र के बदहाली का जमीनी जायजा लिया गया, तो भ्रष्टाचार की कई परतें उखड़ने लगीं। सयुक्त किसान संगठन के प्रतिनिधि मुकेश गुर्जर ने आरोप लगाया कि अस्पताल की छत नीचे से ऊपर तक टपक रही है। न स्वास्थ्य विभाग का ध्यान है, न सरपंच का और न ही किसी पंचायत सचिव का। ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि लगभग तीन साल पहले एक ठेकेदार द्वारा चार से पांच लाख रुपये की लागत से इस भवन की मरम्मत का कार्य किया गया था। लेकिन यह मरम्मत केवल कागजों और कमीशनबाजी तक सीमित रही। काम में इतनी घटिया सामग्री का इस्तेमाल हुआ कि आज मरम्मत के दावों की सरेआम पोल खुल गई है।
इस घोर अनदेखी पर संयुक्त कृषक संगठन और क्षेत्रीय ग्रामीणों ने कड़ा रोष व्यक्त किया है। उन्होंने मांग की है कि स्वास्थ्य विभाग की इस घोर लापरवाही की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच की जाए। इसके साथ ही, घटिया मरम्मत कार्य करने वाले ठेकेदार के खिलाफ तुरंत दंडात्मक कार्रवाई करते हुए एफआईआर दर्ज की जाए। संगठन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस मामले में संज्ञान लेकर कार्रवाई नहीं की गई और अस्पताल की दशा नहीं सुधारी गई, तो संगठन और ग्रामीण मिल कर
उग्र आंदोलन करने को बाध्य होंगे।
