विमानों की होगी छुट्टी, बसों में मिलेगा चाय-कॉपी और नाश्ताः गडकरी

नयी दिल्ली 10 जुलाई (वार्ता) केंद्रीय सड़क-परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गड़करी ने कहा है कि भारत में जल्द ही ऐसी बसें चलने लगेंगी, जिसमें चाय-कॉपी और नाश्ता मिलेगा यानी बस में वह हर सुविधा मुहैया होगी, जो विमानों में मिलती है और इन बसों में किराया मौजूदा समय में डीजल से चलने वाली बसों के किराये से न्यूनत 30 प्रतिशत कम होगा।

भारत विकास परिषद के 62वें स्थापना दिवस के मौके पर यहां आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए श्री गड़करी ने कहा कि यूरोप में 18 और 24 मीटर की बसे चलती हैं और बसे मेट्रो की तरह की तरह की होती हैं। ये बसे बिजली से चलती हैं। उन्होंने कहा, “ इन बसों को देखने के बाद मैने टाटा को बोला कि चेकोस्लोवाकिया की स्कोडा कंपनी के साथ समझौता करो और इस तरह की बसों को भारत में लेकर आओ। इस दौरान उन्होंने बताया कि हिताची नामक कंपनी ने बताया कि 132 सीट की बस चार्ज होगी और एक बार चार्ज करने पर वह 40 किलोमीटर की दूरी तय करेगी।” उन्होंने कहा कि अभी हमारे यहां डीजल की बसें चलती है और इस पर 115 रुपये प्रति किलोमीटर खर्च आता है और इलेक्ट्रिक बस पर 60 रुपये प्रति किलोमीटर खर्च आता है। उन्होंने बताया कि इस बस का खर्चा 30 से 35 रुपये प्रति किलोमीटर होगा। उन्होंने कहा, “मैं टाटा को कहा है कि बस ऐसा बनाओ, जिसमें सब एग्जीक्यूटिव क्लास हो। जैसे विमान में एयर होस्टेस होती है, वैसे बस होस्टेस होगी, चाय-कॉपी और नाश्ता मिलेगा। सीट के सामने लैबटॉप लगेगा। टिकट के बजाय कार्ड का इस्तेमाल होगा और टिकट की दर डीजल बस की तुलना में न्यूनतम 30 प्रतिशत कम होगा। मैं आपको गारंटी देता हूं कि अगले साल जनवरी तक दिल्ली से देहरादून, दिल्ली से चंडीगढ़ और दिल्ली से जयपुर के बीच विमान सेवा बंद हो जाएगी।”

इस दौरान उन्होंने कहा कि कहा,“ देश के विभिन्न क्षेत्रों में अभी भी एक आदमी द्वारा दूसरे आदमी के ढोने की परम्परा ( साइकिल- रिक्शा से ढोने की प्रथा) कायम है और मैं इस परम्परा को समाप्त करने क लिए प्रयासरत हूं।”

उन्होंने कहा ,“ मैंने इस कुप्रथा को समाप्त करने के लिए ई- रिक्शा और ई- कार्ट जैसे कदम उठाया है। जिस दिन हमारे देश से यह कुप्रथा समाप्त हो जाएगी, वह दिन मेरे जीवन का और हम सभी के लिए ऐतिहासिक दिन होगा तथा यह उपलब्धि हम सभी को गौरवान्वित करने वाली होगी।”

इस मौके पर उन्होंने भारत विकास परिषद के सामाजिक कार्यों की प्रशंसा करते हुए कहा कि सामाजिक संस्थाएं और समाज निर्माण के कार्यों में लगे लोग 100 साल के बारे में सोचते हैं, जबकि राजनेता सिर्फ पांच साल की सोचते हैं यानी सिर्फ चुनाव के बारे में सोचते हैं।

उन्होंने भारतीय संस्कृति के बारे में बात करते हुए कहा कि हम गरीब जरूर है, लेकिन हमारे संस्कार बहुत अमीर है। उन्होंने कहा कि एक बार ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ने मुझसे पूछा कि आपके यहां समस्या क्या है, तो मैने बताया कि मेरे यहां जनसंख्या बहुत है, इसलिए गरीबी, मुखमरी जैसी समस्याएं हैं। फिर मैंने उनसे पूछा कि आपके यहां समस्या क्या है, तो उन्हें कहा कि हमारे बच्चे शादी नहीं करना चाहते हैं। वे लिविंग रिलेशनशीप में रहना चाहते हैं। इस वजह से मैं सोचता हूं कि अगर ऐसा कि रहा, तो आने वाले समय में सांस्कृतिक परंपराओं का क्या हो। फिर उन्होंने मुझसे पूछा कि आपका देश गरीब है, तो क्या आपके यहां ये समस्या नहीं है, तो मैंने कहा कि हमारे यहां यह समस्या नहीं के बराबर है। मैंने उन्हें बताया कि हमारे देश गरीब जरूर है, लेकिन संस्कृति के मामले में हमारा देश दुनिया में सबसे अमीर है।

गौरतलब है कि भारत विकास परिषद स्वामी विवेकानंद के आदर्शो पर चलने वाली एक स्वयंसेवी संस्था है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की एक इकाई भारत विकास परिषद की स्थापना डॉ. सूरज प्रकाश ने 10 जुलाई 1963 में की थी। यह संस्था सम्पर्क, सहयोग, संस्कार, सेवा और समर्पण की भावना से काम करतीं है और इसका मुख्य उद्देश्य स्वस्थ, समर्थ और संस्कारित भारत का निर्माण करना है।

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