जबलपुर: भोपाल से फरमान मिलने के बाद गैर-शैक्षणिक कार्यों में जमे 7 शिक्षकों की अटैचमेंट समाप्त कर दी गई है। दरअसल लोक शिक्षण संचालनालय भोपाल द्वारा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में कलेक्टरों के साथ सीधी बातचीत की थी और चौबीस घंटे के भीतर शिक्षकों को उनके मूल विद्यालयों में कार्यभार ग्रहण करना का फरमान सुनाया था। कड़े निर्देशों के बाद, जबलपुर जिले के विभिन्न सरकारी विभागों और कार्यालयों में अटैच 7 शिक्षकों की संबद्धता तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी गई है। सरकारी स्कूलों में पढ़ाई व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए जिला शिक्षा अधिकारी जबलपुर ने एक्शन लिया है। जिसके बाद शिक्षा विभाग में सालों से चली आ रही अटैचमेेंट व्यवस्था पर विराम लग गया।
डीईओ द्वारा जारी आधिकारिक आदेश के अनुसार, इन सभी शिक्षकों को तुरंत गैर-शैक्षणिक कार्य छोडक़र अपने मूल स्कूलों में जॉइन करने के निर्देश दिए गए हैं। आदेश का पालन न करने पर संबंधित शिक्षकों का वेतन रोकने की सख्त चेतावनी भी दी गई है। आदेश में साफ कहा गया है कि गैर-शैक्षणिक कार्य में संलग्न सभी लोकसेवक बिना किसी देरी के अपनी मूल पदस्थापना वाली शालाओं में उपस्थित होना सुनिश्चित करें।
ये शिक्षक मूल शालाओं में लौटाए गए
ऋषि परौहा माध्यमिक शिक्षक को तहसीलदार भू-संसाधन प्रबंधन कार्यालय जबलपुर से शा.उ.मा.वि. कुम्ही सतधारा सिहोरा भेजा गया। इसी प्रकार मोहम्मद तारिक मंसूरी प्राथमिक शिक्षक को तहसील पनागर निर्वाचन शाखा से शा.प्रा.शा. डुंगरिया (पनागर) भेजा गया। मनोज कुमार गुप्ता व्याख्याता को विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय जबलपुर से शा. गांधी स्मारक उ.मा.वि. अधारताल भेजा गया।
विकास चौबहा सहायक शिक्षक को कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन कार्यालय से शा.प्रा.शा. मरही माता बेलबाग भेजा गया। इसी प्रकार सुरेश झारिया प्राथमिक शिक्षक को तहसील एवं जनगणना कार्यालय गोरखपुर से शा. उ. मा. विद्यालय सहशिक्षा गढ़ा भेजा गया। नीरजा द्विवेदी उच्च माध्यमिक शिक्षक को शा. पोस्ट मैट्रिक नवीन कन्या छात्रावास नीमखेड़ा से शा. उ. मा. वि. बालक पड़वार जबलपुर ग्रामीण भेजा गया। मनोज कुमार पाण्डे माध्यमिक शिक्षक को जिला पंचायत एवं साक्षरता मिशन कार्यालय से शा.पीएम. शा. उ. मा. वि. मालगुजार जबलपुर भेजा गया।
नहीं चली सिफारिश, दबाव
डीईओ ने जबलपुर, सिहोरा और पनागर के विकासखंड शिक्षा अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि यदि ये शिक्षक अपने मूल स्कूलों में ड्यूटी पर नहीं लौटते हैं, तो उनका वेतन तत्काल रोक दिया जाए और जिला कार्यालय को रिपोर्ट भेजी जाए। आदेश के बाद हडक़ंप मच गया और शिक्षकों को रिलीव करने की प्रक्रिया पूरी हुई। इस दौरान किसी की सिफारिश या दबाव नहीं चला ।
