तेहरान, ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने ‘ऑपरेशन नस्र 2’ के तहत बहरीन और कुवैत स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर भीषण मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं। IRGC के अनुसार, यह कार्रवाई ईरान के तटीय ठिकानों पर हुए अमेरिकी हमलों का सीधा जवाब है। इन हमलों में बहरीन के शेख ईसा एयर बेस पर हथियारों के जखीरे को निशाना बनाया गया, जबकि कुवैत के अली अल सलेम एयर बेस पर तैनात कई अमेरिकी एमक्यू-9 ड्रोन नष्ट कर दिए गए हैं।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड का सैन्य अभियान
इससे पहले अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने 13 जुलाई को ईरान के दक्षिणी तट पर स्थित बुशहर, चाह बहार, जस्क और बंदर अब्बास जैसे महत्वपूर्ण सैन्य बुनियादी ढांचों पर सटीक हवाई हमले किए थे। अमेरिकी सेना का दावा है कि ये हमले होर्मुज जलडमरूमध्य में वाणिज्यिक शिपिंग लेन को सुरक्षित करने और ईरान की मिसाइल व ड्रोन क्षमताओं को कमजोर करने के लिए किए गए थे। मध्य-पूर्व में 50,000 से अधिक अमेरिकी सैनिक तैनात हैं, जो क्षेत्र की बढ़ती अस्थिरता के बीच उच्च अलर्ट पर हैं।
ऊर्जा निर्यात और युद्ध की चेतावनी
ईरान ने चेतावनी दी है कि यदि अमेरिकी सैन्य कार्रवाई जारी रहती है, तो इसके परिणाम क्षेत्र के ऊर्जा निर्यात पर पड़ेंगे। IRGC ने स्पष्ट किया है कि जब तक अमेरिका की सैन्य मौजूदगी बनी रहेगी, खाड़ी क्षेत्र से तेल और गैस का निर्यात बाधित हो सकता है। यह तनाव अब ईरान के भीतर तक सीमित न रहकर खाड़ी के अन्य देशों में स्थित अमेरिकी ठिकानों तक फैल गया है, जिससे वैश्विक स्तर पर ऊर्जा सुरक्षा और भू-राजनीतिक स्थिति पर गंभीर संकट के बादल मंडराने लगे हैं।

