इंदौर: नगर निगम द्वारा पुराने शहर में सड़क चौड़ीकरण के बाद डाटा फार्म के नाम पर नक्शे स्वीकृत नहीं करना, जनता के संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है. नामांतरण घोटाले पर पर्दा डालने और शासन द्वारा 2021 में कॉलोनी अधिनियम में संशोधन करने के बाद 5 साल बाद लागू करने पर कांग्रेस नेता प्रतिपक्ष ने महापौर और आयुक्त की कार्य शैली पर सवाल उठाए हैं.
नगर निगम में कांग्रेस नेता प्रतिपक्ष सोनिला मिमरोट भाटिया ने आज पत्रकारों से चर्चा की. सोनिला मिमरोट ने पुराने शहर में एडम नागरिकों के सड़क चौड़ीकरण में तोड़े गये मकानों के नक्शे स्वीकृत नहीं करने को लेकर महापौर पुष्यमित्र भार्गव और आयुक्त क्षितिज सिंघल से सवाल किया. उन्होंने कहा कि डाटा फार्म के नाम पर निगम जनता के नक्शे मंजूर नहीं कर रहा है. पिछले एक साल में डाटा फार्म से नक्शे स्वीकृत करने की बात कही जा रही है, लेकिन आज तक डाटा फार्म से नक्शे स्वीकृत होना शुरू नहीं हुए है.
नेता प्रतिपक्ष सोनिला मिमरोट भाटिया ने महापौर और आयुक्त पर नामांतरण घोटाले पर पर्दा डालने का आरोप लगाया. दोषियों को बचाने में निगम प्रशासन जुटा हुआ है. वहीं नेता प्रतिपक्ष सोनिला ने कहा कि पांच वर्ष बाद नगर निगम 2021 के कॉलोनी अधिनियम में संशोधन करने को लेकर आज जागा है. आज आश्रय निधि को लेकर उसका पालन करवाने की 2026 में याद आई?
उन्होंने स्पष्ट किया कि नगर निगम ने शहर में उक्त संशोधन का समय पर पालन किया होता तो बहुमंजिला इमारतों में बीपीएल और ईडब्ल्यूएस वर्ग के गरीब परिवारों को आवास मिल सकते थे. उन्होंने भवन अनुज्ञा शाखा पर गरीबों के आवास अधिकारों की अनदेखी का आरोप लगाया. नेता प्रतिपक्ष ने उपरोक्त मुद्दों को लेकर आयुक्त से भवन अनुज्ञा शाखा, नामांतरण घोटाले और गरीबों के आवास अनदेखी करने वाले अधिकारियों के खिलाफ निष्पक्ष जांच कर कार्रवाई की मांग की है
