नयी दिल्ली, 09 जुलाई (वार्ता) इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार ने लीथियम आयन बैटरी और मोबाइल फोन के वायरलेस चार्जिंग में इस्तेमाल होने वाले इंडक्टर कॉइल मॉड्यूल समेत कुछ उत्पादों के विनिर्माण में इस्तेमाल होने वाली वस्तुओं को मूल सीमा शुल्क से छूट प्रदान कर दी है।
वित्त मंत्रालय की ओर से 08 जुलाई को जारी तीन अलग-अलग अधिसूचनाओं के जरिए इन वस्तुओं को छूट प्राप्त सूची में शामिल किया गया है। सरकार ने सभी तरह के लिथियम-आयन सेल के निर्माण में प्रयुक्त पूंजीगत वस्तुओं पर मूल सीमा शुल्क शून्य कर दिया है। इससे पहले यह छूट केवल उन लिथियम-आयन सेल के निर्माण से संबंधित थी, जिनका उपयोग विशिष्ट प्रकार की बैटरियों, जैसे मोबाइल फोन, इलेक्ट्रिक वाहन या ऊर्जा भंडारण प्रणालियों में किया जाता था। अब बैटरियों के अंतिम उपयोग से जुड़ी शर्त को समाप्त कर दिया गया है। इससे इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, ऊर्जा भंडारण तथा अन्य विभिन्न कार्यों में प्रयुक्त बैटरियों के लिए लिथियम-आयन सेल के घरेलू विनिर्माण को प्रोत्साहन मिलेगा।
इसी प्रकार ऑटोमोटिव, चिकित्सा एवं औद्योगिक इस्तेमाल के लिए डिस्प्ले असेंबली के निर्माण में उपयोग होने वाली वस्तुओं एवं पुर्जों पर मूल सीमा शुल्क शून्य कर दिया गया है। यह छूट 31 मार्च 2029 तक जारी रहेगी। इस कदम का उद्देश्य ऑटोमोटिव, मेडिकल एवं औद्योगिक क्षेत्रों में उपयोग होने वाली डिस्प्ले असेंबली के घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देना है।
अधिसूचना के अनुसार सेलुलर मोबाइल फोन, वियरेबल डिवाइस, टेलीविजन तथा इंटरैक्टिव फ्लैट पैनल डिस्प्ले में प्रयुक्त समान डिस्प्ले के इनपुट्स एवं पुर्जों को इससे बाहर रखा है। उन पर पहले से ही उनकी संबंधित चरणबद्ध शुल्क संरचनाओं के अंतर्गत रियायती सीमा शुल्क उपलब्ध है।
सेलुलर मोबाइल फोन में वायरलेस चार्जिंग के लिए इंडक्टर कॉइल मॉड्यूल के निर्माण में उपयोग होने वाली वस्तुओं को भी 31 मार्च 2029 तक के लिए मूल सीमा शुल्क से छूट प्रदान की गयी है। इससे मोबाइल फोन विनिर्माण में घरेलू मूल्य संवर्धन को और अधिक बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
