देश में वैश्विक क्षमता केंद्रों का विस्तार एक बड़ी सफलता, 2030 तक 5000 केंद्रो का लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है:सीतारमण

नयी दिल्ली, 09 जुलाई (वार्ता) केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भारत में तेजी से उभर रहे वैश्वक क्षमता केंद्रों (सीसीसी) के विस्तार को एक बड़ी सफलता बताते हुए गुरुवार को कहा कि देश के लिए इस क्षेत्र में अभी बहुत अवसर हैं और 2030 तक 5000 जीसीसी स्थापित करने का लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है।

श्रीमती सीतारमण भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) द्वारा आयोजित जीसीसी शिखर सम्मेलन 2026 के समापन सत्र को संबोधित कर रही थी। उन्होंने कहा कि सरकार के साथ सहयोग से देश में भविष्य के लिए और अधिक मजबूत जीसीसी पारिस्थितिकी तंत्र विकसित किया जा सकता है। वर्तमान में देश में 2,100 से अधिक जीसीसी संचालित हैं। इनमें लगभग 23 लाख पेशेवर कार्यरत हैं और प्रतिवर्ष लगभग 100 अरब अमेरिकी डॉलर का राजस्व उत्पन्न करते हैं। फोर्ब्स ग्लोबल- 2000 की 500 से अधिक कंपनियों ने भारत में अपने जीसीसी स्थापित किये हैं।

उन्होंने कहा कि आज अधिकांश बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ अपना अगला जीसीसी दुनिया के किसी अन्य देश की तुलना में भारत में स्थापित करने को प्राथमिकता दे रही हैं। वर्ष 2030 तक लगभग 5,000 जीसीसी विकसित करने का लक्ष्य यथार्थवादी और प्राप्त किया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत के पास वैश्विक अर्थव्यवस्था में अपनी भूमिका को नए सिरे से परिभाषित करने का अवसर है। उन्होंने अधिक से अधिक वैश्विक कंपनियों को जीसीसी स्थापित करने के लिए आकर्षित करने पर बल देते हुए कहा कि फार्च्यून ग्लोबल-2000 की सूची में शामिल लगभग दो-तिहाई कंपनियों ने अभी तक भारत में अपना जीसीसी स्थापित नहीं किया है। यह भारत के लिए सबसे बड़े अप्रयुक्त निवेश अवसरों में से एक है।

उन्होंने कहा कि देश में जीसीसी का विस्तार एक क्षेत्र विशेष की सफलता की कहनी बढ़ कर देश को ज्ञान आधारित वैश्विक अर्थव्यवस्था में नेतृत्वकारी कतार में स्थान दिलाने का अवसर बाताते हुए उद्योग जगत के समक्ष सरकार की ओर से पांच अपेक्षाएं रखीं जिनमें उत्पाद श्रृंखला में उत्तरोत्तर उच्च स्थान प्राप्त करने , भारत के ज्ञान संस्थानों के साथ सहयोग मजबूत करने तथा टीयर-2 और टीयर-3 शहरों में जीसीसी का विस्तार करने जैसी अपेक्षाएं शामिल हैं।

उन्होंने इस बार के बजट में प्रौद्योगिकी क्षेत्र और जीसीसी के लिए अनुकूल नीतिगत व्यवस्था को मजबूत करने की घोषणाओं का उल्लेख करते हुए राज्यों के साथ उनके सहयोग के नितिगत बढ़ाने की नीति का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा , ‘ भारत की जीसीसी यात्रा केवल एक उद्योग की सफलता की कहानी नहीं , बल्कि भारत को वैश्विक ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था का अनिवार्य भाग बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे भारत की दीर्घकालिक आर्थिक मजबूती और रणनीतिक महत्व बढ़ेगा।..भारत के पास इस परिवर्तन का नेतृत्व करने के लिए आवश्यक सभी संसाधन उपलब्ध हैं।”

उन्होंने उद्योग जगत के समक्ष जीसीसीके विकास के अगले चरण के लिए पांच प्रमुख अपेक्षाएं रखते हुए उत्पादन श्रृंखला में ऊंचे मुकाम हासिल करने की अपेक्षा के तहत बौद्धिक संपदा का सृजन करने, अत्याधुनिक अनुसंधान का नेतृत्व करने, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित अनुप्रयोग विकसित करने, उत्पाद संरचना का स्वामित्व अपने हाथ में लेने और वैश्विक नवाचार का नेतृत्व करने को कहा। दूसरी अपेक्षा के तहत उन्होंने उद्योगों से देश के विशेषज्ञ संस्थानों के साथ सहयोग मजबूत करने, विश्वविद्यालयों, स्टार्टअप्स और उत्कृष्टता केंद्रों के साथ मजबूत साझेदारी स्थापित करने को कहा । उन्होंने कहा कि इससेअनुसंधान प्रयोगशालाओं से नवाचार को सीधे बाज़ार तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।

उन्होंने उद्योग जगत से जीसीसी को टियर-2 और टियर-3 शहरों तक पहुंचाने की अपनेक्षा करते हुए कहा कि ये शहर तेज़ी से प्रतिभा, आधारभूत संरचना और नवाचार क्षमता विकसित कर रहे हैं। कई उभरते शहरों में अभी भी के आर्थिक प्रभाव के प्रति पर्याप्त जागरूकता नहीं है। उन्होंने कहा, ‘ उद्योग राज्य सरकारों, नगर प्रशासन, शैक्षणिक संस्थानों और स्थानीय समुदायों के साथ मिलकर इन शहरों को जीसीसी निवेश की अगली लहर के लिए तैयार करे।”

श्रीमती सीतारमण ने जीसीसी से भारत की क्षमताओं के ब्रांड एंबेसडर बनने की अपील करते हुए कहा कि जिन कंपनियों ने भारत में सफल निवेश किया है, वे भारत की सबसे विश्वसनीय पहचान हैं।

पाचवीं अपेक्षा के तौर पर उन्होंने उद्योगों से सरकार के साथ साझेदारी और मजबूत करने की जरूरत पर बल दिया और नीतियों, प्रक्रियाओं, प्रतिभा और बुनियादी ढाँचे से जुड़े व्यावहारिक सुझाव सरकार के साथ साझा करते रहने को कहा। उन्होंने कहा, ‘ हमारा लक्ष्य केवल दुनिया के क्षमता केंद्रों की मेजबानी करना नहीं, बल्कि भविष्य की नयी तकनीकों, उत्पादों और वैश्विक उद्यमों का निर्माण करना है।

श्रीमती सीतारमण ने बताया कि विश्वभर के निवेशकों और उद्योग जगत के नेताओं के साथ बातचीत में यह स्पष्ट हुआ है कि कई अन्य कंपनियाँ भारत में जीसीसी स्थापित करने की योजना बना रही हैं। उन्होंने इसी संदर्भ में एक नाम फ्रांस की एयर लिक्विड का लिया जिसने पुणे में जीसीसी स्थापित किया है। उन्होंने उद्योग जगत से सरकार के साथ सरकार के साथ नियमित संवाद बनाये रखने का आग्रह करते हुए कहा कि इससे नयी चुनौतियों की पहचान होगी और नीतियों में समय पर सुधार किया जा सकेगा। राज्य सरकारों और नगर प्रशासन के साथ भी सहयोग बढ़ाया जाये, ताकि नये जीसीसी स्थानों पर उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप आधारभूत संरचना, कौशल विकास और संस्थागत सहयोग विकसित किया जा सके। इससे नीति-निर्माताओं को जीसीसी के महत्व को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिलेगी।

उन्होंने कहा कि सरकार ने कहा कि सीआईआई द्वारा तैयार राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय व्यवस्था के प्रारूप सहयोगात्मक नीति निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। इनके माध्यम से उद्योग केवल समस्याएँ नहीं बताता, बल्कि उनके व्यावहारिक समाधान भी प्रस्तुत करता है। उन्होंने जीसीसी को प्रोत्साहित करने के उद्येश्य से केंद्रीय बजट 2026-27 में कई महत्वपूर्ण घोषणाओं का भी उल्लेख किया जिसमें आईटी एवं आईटी-सक्षम सेवाओं के लिए एकीकृत सेफ हार्बर व्यवस्था लागू की गयी, जिससे ट्रांसफर प्राइसिंग अनुपालन आसान होगा। इसी तरह सेफ हार्बर संबंधी सीमा 300 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 2,000 करोड़ रुपये कर दी गयी, जिससे और अधिक कंपनियाँ सरल अनुपालन व्यवस्था के दायरे में आयेंगी। बजट में फास्ट-ट्रैक एडवांस प्राइसिंग एग्रीमेंट (एपीए) व्यवस्था लागू की गयी, जिससे कर संबंधी निश्चितता बढ़ेगी।

वित्त मंत्री ने कहा कि भारत आज दुनिया का सबसे बड़ा जीसीसी केंद्र है लेकिन आज स्थापित हो रहे जीसीसी पहले की तुलना में बिल्कुल अलग हैं। अब उन्हें कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), इंजीनियरिंग अनुसंधान एवं विकास (ईआरडी), साइबर सुरक्षा , डिजिटल प्लेटफॉर्म, उत्पाद संरचना वित्तीय नवाचार एंटरप्राइज परिवर्तन नए स्थापित होने वाले आधे से अधिक जीसीसी अब ‘एआई-प्रथम’ हैं। उन्होंने कहा, ‘भारतीय जीसीसीअब वैश्विक नेतृत्व और रणनीतिक निर्णयों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।अर्थात् भारत की पहचान अब केवल कम लागत नहीं, बल्कि उच्च क्षमता और नेतृत्व के रूप में स्थापित हो चुकी है।”

 

 

 

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