भोपाल:बीना से विधायक निर्मला सप्रे के कथित दल-बदल मामले में कांग्रेस को झटका लगा है। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने उनकी विधानसभा सदस्यता समाप्त करने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि निर्मला सप्रे के भाजपा में शामिल होने या पार्टी की सदस्यता लेने के संबंध में कोई ठोस दस्तावेजी प्रमाण सामने नहीं आए हैं।
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने निर्मला सप्रे पर भाजपा के पक्ष में जाने और पार्टी के लिए प्रचार करने का आरोप लगाते हुए मई 2024 में विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष उनकी सदस्यता समाप्त करने की मांग की थी। विधानसभा अध्यक्ष की ओर से निर्णय नहीं होने के बाद उन्होंने हाईकोर्ट का रुख किया था।सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि दल-बदल संबंधी प्रक्रिया विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष पहले से चल रही है। ऐसे में अध्यक्ष को किसी निश्चित समय सीमा में फैसला लेने के लिए बाध्य करना उचित नहीं होगा। कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि ऐसा कोई प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया गया है, जिससे यह साबित हो कि निर्मला सप्रे को औपचारिक रूप से कांग्रेस से निष्कासित किया गया या उन्होंने भाजपा की सदस्यता ग्रहण की।
कांग्रेस की ओर से आरोप लगाया गया था कि 2023 के लोकसभा चुनाव के दौरान निर्मला सप्रे भाजपा के साथ सक्रिय रूप से जुड़ी थीं। वहीं, याचिकाकर्ता पक्ष का दावा था कि उनके भाजपा में जाने के प्रमाण सोशल मीडिया पर मौजूद हैं। हालांकि हाईकोर्ट ने इन दावों को पर्याप्त आधार नहीं माना और याचिका को खारिज कर दिया।
