तिरुवनंतपुरम, 23 जून (वार्ता) केरल विधानसभा में मंगलवार को कम अल्कोहल वाले पेय पदार्थों पर कम टैक्स लगाने के राज्य सरकार के प्रस्ताव पर हंगामेदार स्थिति उत्पन्न हो गयी और विपक्ष ने इसे शराब की खपत को बढ़ावा देने का आरोप लगाया।
यह मुद्दा सदन की कार्यवाही में छाया रहा, जिससे सदन में बार-बार विरोध और रुकावटें आईं। यह विवाद 2026-27 के राज्य बजट पर है, जिसमें 0.5 प्रतिशत से 20 प्रतिशत अल्कोहल वाले पेय पदार्थों के लिए एक अलग कर ढांचे का प्रस्ताव है। प्रस्ताव के तहत 0.5 प्रतिशत से 10 प्रतिशत अल्कोहल वाले उत्पादों पर 120 प्रतिशत बिक्री कर लगेगा। इसकी तुलना में जिनमें 10 प्रतिशत से 20 प्रतिशत अल्कोहल होगा, उन पर 175 प्रतिशत टैक्स लगेगा- जो भारत में बनी विदेशी शराब (आईएमएफएल) पर लगाई गई दरों से काफी कम है।
विपक्षी विधायकों ने सरकार पर अपनी शराब नीति से पीछे हटने का आरोप लगाते हुए कहा कि कर का बोझ कम होने से शराब अधिक सस्ती हो जाएगी, जिससे शायद अधिक खपत को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने इस प्रस्ताव को वापस लेने की मांग करते हुए इसे राज्य के स्वास्थ्य के लक्ष्यों के खिलाफ बताया।
सरकार ने प्रस्ताव का बचाव करते हुए साफ किया कि यह कोई नयी शराब नीति नहीं है बल्कि इसका मकसद मौजूदा उत्पाद शुल्कों के नियमों के तहत पहले से ही अनुमति वाले कम अल्कोहल वाले पेय पदार्थों के लिए एक अलग कर प्रणाली बनाना है।
सरकार का कहना है कि इस कदम का मकसद शराब की बिक्री को बढ़ावा देने की बजाय कर को आसान बनाना है। सरकार के स्पष्टीकरण के बावजूद इस प्रस्ताव ने बड़े पैमाने पर राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है, जिसमें विपक्ष ने विधानसभा के अंदर और बाहर अपना विरोध जारी रखने का संकल्प लिया है।इस मुद्दे से मौजूदा बजट सत्र हंगामेदार रह सकता है।
