इटारसी। इनसान अपनी कर्मभूमि के शिखर पर चाहे जितनी ऊंचाइयों को छू ले, लेकिन उसकी अंतरात्मा हमेशा अपनी मातृभूमि की खुशबू और बचपन की गलियों के लिए लालायित रहती है। कुछ ऐसा ही भावुक और प्रेरणादायी नजारा बीते बुधवार (17 जून) की शाम को स्थानीय गांधी मैदान पर देखने को मिला। इटारसी की माटी में जन्मे, पले-बढ़े और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन में डायरेक्टर के गरिमामयी पद से वर्ष 2015 में सेवानिवृत्त हुए प्रख्यात वैज्ञानिक विक्रम देसाई ने जब वीडियो कॉल के जरिए इटारसी के उभरते हुए हॉकी खिलाडिय़ों से बात की, तो मैदान का हर कोना उनकी पुरानी यादों और आत्मीयता से महक उठा। हाल ही में जापान में आयोजित अंडर-18 हॉकी प्रतियोगिता में इटारसी के प्रतिभावान खिलाडिय़ों के भारतीय टीम में शामिल होने की खबर जैसे ही अहमदाबाद में रह रहे श्री देसाई तक पहुंची, अपनी जन्मभूमि के इन होनहारों की उपलब्धि पर उनका सीना गर्व से चौड़ा हो गया। वे खुद को रोक नहीं पाए और सीनियर हॉकी खिलाड़ी कन्हैया गुरयानी के प्रयासों से बुधवार शाम को गांधी मैदान पर अभ्यास कर रहे बच्चों से सीधे संवाद किया।
1977 में छूटा था शहर, पर दिल में आज भी धड़कता है इटारसी
विक्रम देसाई वर्ष 1971 के दौर में इटारसी के सूरजगंज क्षेत्र में रहते थे। वे पढ़ाई में जितने कुशाग्र थे, खेल के मैदान पर भी उतने ही चपल थे। वे न केवल बेहतरीन क्रिकेट खेलते थे, बल्कि हॉकी की स्टिक थामकर मैदान पर जादुई खेल भी दिखाते थे। वर्ष 1977 में उच्च शिक्षा के लिए वे इटारसी से अहमदाबाद चले गए, जहां से उनकी वैज्ञानिक यात्रा शुरू हुई और वे देश के शीर्ष अंतरिक्ष संगठन के डायरेक्टर बने।
