जयपुर, 16 जून (वार्ता) राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा है कि उनके बयान ‘इंदिरा गांधी जैसी नेता आज होतीं तो जनप्रतिनिधित्व अधिनियम (आरपीए) के तहत भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर प्रतिबंध लगा देती।
श्री गहलोत ने मंगलवार को यहां मीडिया से बातचीत में यह बात कही। उन्होंने कहा, “ आरएसएस वाले कहें या उनके बड़े नेता, वे बकायदा तय करते हैं कि आपको आज यह बयान देना है और आपको वह। कई बार तो जो लिखित बयान मीडिया में छपता है, उसकी भाषा और शब्दावली उन नेताओं की होती ही नहीं है। मैं उनमें से कई अच्छे लोगों को व्यक्तिगत रूप से जानता हूं और उनकी वास्तविक भाषा से वाकिफ हूं। जब उनकी बदली हुई भाषा सामने आती है, तो साफ समझ आ जाता है कि यह ऊपर से लिखकर आया है और वे केवल उसे दोहरा रहे हैं। ”
श्री गहलाेत ने कहा कि उन्होंने जो कानूनी पहलू उठाया है, उस पर आज पूरे देश में चर्चा हो रही है और यह अच्छी बात है। लोकतंत्र में चर्चा होते रहनी चाहिए, क्योंकि उसी से एक राष्ट्रीय बहस बनती है और मंथन से ही सही बातें निकलकर सामने आती हैं।
उन्होंने कहा कि वह तो केवल यह पूछ रहे हैं कि हमारा कानून और संविधान इस बारे में क्या कहता है। एक तरफ आप भी संविधान की दुहाई देते हैं, वहीं दूसरी तरफ जब श्री गांधी कहते हैं कि संविधान की रक्षा करो, तो आप उसी संविधान की धज्जियां उड़ा रहे हैं।
उन्होंने आरपीए, 1951 के बारे में समझाते हुए कहा कि धारा 123 (3), आरपीए 1951: इसके तहत किसी भी उम्मीदवार या उसके एजेंट द्वारा धर्म, जाति, समुदाय या धार्मिक प्रतीकों के आधार पर वोट मांगना पूरी तरह प्रतिबंधित है। कानून बिल्कुल साफ है, ऐसा करने पर चुनाव शून्य घोषित हो जाता है और दोषी पर छह वर्ष तक चुनाव लड़ने की रोक लग सकती है।
उन्होंने न्यायालय के कई फैसलों के उदाहरण भी दिये और कहा, “ श्री भैंरों सिंह शेखावत का मामला (1995-96): जिसका जिक्र मैंने कल भी किया था। चुनाव रैलियों में राम मंदिर और लक्ष्मी जी के प्रतीकों का इस्तेमाल करने के आरोपों को लेकर उनके खिलाफ मामला चला था। बाद में उच्चत्तम न्यायालय ने उस याचिका को खारिज कर दिया था, लेकिन चूंकि वह 1993 का चुनाव जीतकर मुख्यमंत्री बन चुके थे, इसलिए उच्च न्यायालय के स्तर पर वह इस मामले में काफी गंभीर रूप से घिर गये थे। हम सब जानते हैं कि जब कोई मुख्यमंत्री पद पर बैठा हो, तो साक्ष्यों का मिलना कितना कठिन हो जाता है। अंततः साक्ष्यों के अभाव के कारण वह बच गये, अन्यथा वे भी इसमें कानूनी रूप से फंस चुके थे। ”
उन्होंने कहा, “ मैं ये सारे उदाहरण इसलिए दे रहा हूं, क्योंकि मैंने जो कुछ भी कहा है, बेहद सोच-समझकर और तथ्यों के आधार पर कहा है। आज भाजपा खुद को विश्व की सबसे बड़ी पार्टी कहती है, और हो सकता है वह हो भी, क्योंकि जिस प्रकार की कारगुजारियां उन्होंने देश के भीतर की हैं, उसके बाद धन का इतना अंबार इकट्ठा कर लेना कोई बड़ी बात नहीं है। आज उन्हें समझ नहीं आ रहा कि वे इस बेहिसाब पैसे को कहां खर्च करें। दूसरी तरफ, उन्होंने मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस के बैंक अकाउंट तक ब्लॉक करवा दिये।”
