अगले 25 वर्ष आयुष के होंगे: मोदी

जामनगर 19 अप्रैल (वार्ता) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोरोना महामारी और बदलती जीवन शैली का उल्लेख करते हुए मंगलवार को कहा कि दुनिया में अगले 25 वर्ष आयुष चिकित्सा पद्धति और प्राकृतिक चिकित्सा प्रणाली के होंगे।
श्री मोदी ने यहां विश्व स्वास्थ्य संगठन वैश्विक परंपरागत औषधि केंद्र के भवन का शिलान्यास करने के बाद कहा कि कोरोना महामारी ने दुनिया भर में चिकित्सा प्रणाली के और जीवन शैली के प्रति भारी बदलाव किया है। उन्होंने कहा कि दुनिया भर के लोग मौजूदा चिकित्सा प्रणाली और जीवन शैली का विकल्प विकल्प खोज रहे हैं।
इस अवसर पर मारीशस के प्रधानमंत्री प्रविंद्र जगन्नाथ तथा विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक डॉ. टेड्रोस घेब्रेयसस, केंद्रीय आयुष मंत्री सर्बानंद सोनोवाल , स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री मनसुख मांडविया और गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल, आयुष राज्य मंत्री डा महेंद्र भाई कालूभाई मंजूपारा तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे।
श्री मोदी ने कहा कि भारत जब अपनी आजादी के एक 100 वर्ष पूरे कर रहा होगा तो पूरी दुनिया आयुष चिकित्सा पद्धति और प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति की ओर बढ़ चुकी होगी। उन्होंने कहा कि आयुष चिकित्सा प्रणाली और जीवन शैली लोगों के स्वास्थ्य और आरोग्य का मंत्र होगी।
प्रधानमंत्री ने कहा कि अगले 25 वर्ष में दुनिया में स्वास्थ्य के क्षेत्र में नया युग शुरू होगा और जामनगर में बनने वाला यह केंद्र इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। आयुर्वेद का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि पूरे स्वास्थ्य क्षेत्र को समग्रता से देखने की जरूरत है आयुर्वेद ना केवल शारीरिक स्वास्थ्य की बात करता है बल्कि मानसिक स्वास्थ्य भी इसमें शामिल है। पूरी दुनिया में तनाव से निपटने के लिए योग का सहारा लिया जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस घोषित होने के बाद से दुनिया भर में योग के प्रति रुझान बढ़ा है।
श्री मोदी ने कहा कि डब्ल्यूएचओ वैश्विक परंपरागत औषधि केंद्र की स्थापना भारत की वन ‘अर्थ वन हेल्थ’ की संकल्पना के अनुरूप है। उन्होंने कहा कि आधुनिक जीवन शैली ने कई बीमारियों को जन्म दिया है जबकि भारतीय जीवन शैली और चिकित्सा पद्धति संतुलित आहार पर भरोसा करती है। उन्होंने कहा कि इस वैश्विक औषधि केंद्र को ऐसी बीमारियों का समाधान तलाशना चाहिए। इसके लिए ऐसी पद्धति विकसित की जानी चाहिए जिससे परंपरागत औषधियों के इस्तेमाल के साथ-साथ आधुनिक तकनीक का भी प्रयोग किया जा सके।
उन्होंने कहा कि भारतीय जीवन शैली मौसम के अनुसार आहार में विश्वास करती है। भारत में कुछ वर्ष पहले तक बाजरे का इस्तेमाल प्रमुख रूप से होता था लेकिन बीच में यह लगभग गायब हो गया। लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजरा दशक घोषित करने से इसका प्रयोग बढ़ा है।
श्री मोदी ने कहा कि परंपरागत औषधि केंद्र को दुनिया भर में उपलब्ध परंपरागत औषधि का डाटा तैयार करना चाहिए और इनका वैज्ञानिक आधार तैयार किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसी पद्धति तैयार की जानी चाहिए जिससे जिससे लोगों का भरोसा इन औषधियों पर बढ़ सके। दुनिया भर के परंपरागत औषधि केंद्रों को आपस में जोड़ा जाना चाहिए और व्यापक स्तर पर विचार-विमर्श होना चाहिए।
श्री मोदी ने कहा कि औषधियों पर भरोसा बढ़ने और एक नियामक होने से इनका व्यापार बढ़ेगा और स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों तथा ज्ञान का लाभ दुनिया को मिल सकेगा।

नव भारत न्यूज

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