इंदौर: शहर में पानी के लिए मचे हाहाकार के बीच संस्था सेवा सुरभि” द्वारा रविवार को सुबह साउथ तुकोगंज स्थित एक होटल के सभागृह में आयोजित विचार मंथन कार्यक्रम में जहाँ शहर के प्रबुद्धजनों ने पानी की बचत के लिए सुझावों से लेकर नर्मदा के प्रथम चरण से लेकर अब तक के अभियानों पर अपनी-अपनी बात रखी, वहीं नगर निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल ने इस त्रासदी का दूसरा पहलू भी नगर निगम में दर्ज आंकड़ों की खाताबही के हवाले से यह कहते हुए उजागर किया कि शहर में पेयजल का संकट नहीं बल्कि समस्या उसके वितरण व्यवस्था की है.
उन्होंने बताया कि शहर में रोजाना करीब 400 एमएलडी पानी आने के बावजूद कुल 6 लाख से अधिक घरों में से केवल 2 लाख 99 हजार घरों में ही वैध जल कनेक्शन है. बहुत से लोगों ने एक हजार वर्गफीट वाले प्लाट पर बहुमंजिले भवन बना रखे हैं जहाँ पहले 5 लोगों के परिवार को पानी की जरूरत थी वहां अब 25 से 30 लोग रह रहे हैं. इस स्थिति में उन्हें भी टैंकर की जरूरत महसूस होने लगी है. स्थिति यह है कि नर्मदा का पानी जलूद से शहर में लाने पर जो खर्च हो रहा है, उसका पांचवा हिस्सा भी नगर निगम के खजाने में जमा नहीं हो पा रहा है.
शहर में पानी वितरण पर निगरानी रखने के लिए तकनीकी स्टाफ बहुत कम है. तकनीकी स्टाफ की कमी के कारण भी किसी एक संस्था के भरोसे नहीं रहा जा सकता, इसलिए जल संकट के इस दौर में आम नागरिकों का भी दायित्व है कि वे पानी बचाने का प्रयास करें। अब ग्रीष्म काल में पानी बचाने के लिए एक अभियान चलाने की जरूरत है। संस्था सेवा सुरभि द्वारा आयोजित इस वैचारिक मंथन में भोपाल से आए सर्वोदय कार्यकर्ता और विचारक राकेश दीवान, वरिष्ठ अभिभाषक अनिल त्रिवेदी, पर्यावरणविद ओपी जोशी, डॉ. एसएल गर्ग, प्रेस क्लब के पूर्व अध्यक्ष अरविन्द तिवारी ने प्रारम्भ में तुलसी के पौधे को जल समर्पित कर इस चर्चा का शुभारंभ किया. इस मौके पर संस्था से जुड़े पर्यावरण संबंधी विषयों पर लिखने वाले कुमार सिद्धार्थ को नागपुर में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय कांफ्रेंस में केन्द्रीय मंत्री नितिन गडकरी के हाथों सम्मानित होने पर संस्था की ओर से भी सम्मानित किया गया. कलाकर्मी संजय पटेल, भूगर्भ जल विशेषज्ञ डॉ. सुधीन्द्र मोहन शर्मा, वीरेन्द्र गोयल, वीके गुप्ता एवं सेवा सुरभि के संयोजक ओमप्रकाश नरेडा ने उन्हें स्मृति चिन्ह भेंटकर सम्मानित किया.
पानी का कम से कम दुरूपयोग हो
चर्चा की शुरुआत राकेश दीवान ने यह कहते हुए की कि हम पेड़ कितने ही लगा लें, जंगल नहीं बसा सकते.ैं. भूगर्भ जल विशेषज्ञ डॉ. सुधीन्द्र मोहन शर्मा ने कहा कि हम ऐसे गिने-चुने शहरों में हैं जहाँ कोई नदी नहीं है. पानी से जुड़े अलग-अलग तरह के संकट हमारे सामने आते जा रहे हैं. वाटर रिचार्जिंग की मोनिटरिंग के साथ ही हमें अपनी पानी की जरूरतों को भी कैसे कम करना है यह चिंतन भी जरुरी है. औद्योगिक संगठन पीथमपुर के अध्यक्ष गौतम कोठारी ने पीथमपुर की जल समस्या पर ध्यानाकर्षण करते हुए कहा कि घरों में पानी का कम से कम दुरुपयोग हो इसका भी ध्यान रखना होगा। पर्यावरणविद दिलीप वाघेला ने अनेक सुझाव देते हुए कहा कि सरकारी दफ्तरों और भवनों की छतों पर जल पुर्नभरण की व्यवस्था अनिवार्य होना चाहिए। बाग-बगीचों में भी वाटर रिचार्जिंग व्यवस्था होना चाहिए.
