इस तरह आपके वाहन की लागत बढ़ा सकती है ऑटो लोन की अवधि

श्री जी. एम. जिलानी, ज्वाइंट एमडी और चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर (रिटेल फाइनेंस बिजनेस, पैन-इंडिया), श्रीराम फाइनेंस

जब लोग वाहन खरीदते हैं, तो सबसे पहले वे ईएमआई देखते हैं। उस समय कम ईएमआई आसान और हर माह तय धन की अदायगी आसान लगती है। यही वजह है कि कई वाहन खरीदने वाले लंबी अवधि वाले कर्ज का विकल्प चुनते हैं।

बेशक लंबी अवधि चुनने से भले ही आपका मासिक बोझ कम हो जाता है, लेकिन इससे कर्ज की पूरी अवधि के दौरान चुकाई जाने वाली कुल राशि में इजाफा हो जाता है।

आसान भाषा में कहें तो छोटी ईएमआई भले आकर्षक लग सकती है। लेकिन समय के साथ कर्जदाता को अदा किया जाने वाला कुल ब्याज काफी अधिक हो सकता है। कई कर्ज लेने वाले तो केवल इसी बात पर ध्यान देते हैं कि ईएमआई उनके कुल मासिक बजट में फिट बैठती है या नहीं। लेकिन वे कर्ज की अवधि के अंत तक कुल भुगतान राशि की गणना नहीं करते।

उदाहरण के तौर पर, यदि कोई व्यक्ति 9 फीसदी ब्याज दर पर 10 लाख रुपए का ऑटो लोन लेता है, तो लंबी अवधि चुनने से मासिक ईएमआई काफी कम हो सकती है। लेकिन सात वर्षों में चुकाया जाने वाला कुल ब्याज, तीन या चार वर्ष की कम अवधि की तुलना में कहीं अधिक हो सकता है। कई मामलों में उधारकर्ताओं को केवल लंबी रीपेमेंटअवधि के कारण लाखों रुपए अतिरिक्त चुकाने पड़ सकते हैं।

एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि समय और उपयोग के साथ वाहन का रीसेल मूल्य स्वाभाविक रूप से बदलता रहता है। इसका अर्थ यह है कि जहां कर्ज कई वर्षों तक चलता रह सकता है, वहीं उसी दौरान वाहन का बाजार मूल्य धीरे-धीरे कम हो सकता है।

कल्पना कीजिए कि किसी उधारकर्ता ने पांच वर्षों तक ईएमआई का भुगतान कर दिया है। लेकिन अभी भी कुछ कर्ज की राशि की अदायगी बाकी है। दूसरी ओर, वाहन का रीपेमेंट मूल्य उसकी मूल खरीद कीमत की तुलना में कम हो चुका हो सकता है। इससे उन ग्राहकों के लिए अपग्रेड या रीपेमेंट के निर्णय कभी-कभी अधिक कठिन हो सकते हैं, जो हर कुछ वर्षों में वाहन बदलना पसंद करते हैं।

इसी वजह से सही कर्ज की अवधि का चयन महत्वपूर्ण हो जाता है। आदर्श रूप से, रीपेमेंट अवधि लगभग उतनी ही होनी चाहिए, जितने समय तक आप वाहन अपने पास रखने की योजना बना रहे हों। उदाहरण के लिए, यदि आप आमतौर पर चार से पांच वर्षों में अपना वाहन अपग्रेड करते हैं, तो उसी अवधि के भीतर कर्ज अवधि चुनना लागत को अधिक कुशल तरीके से प्रबंधित करने और कुल ब्याज बोझ कम करने में मदद कर सकता है।

इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) के मामले में यह और भी अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है। क्योंकि खरीदार अक्सर बैटरी वारंटी अवधि, तेजी से बदलती तकनीक और भविष्य में अपग्रेड योजनाओं जैसे पहलुओं को ध्यान में रखते हुए यह तय करते हैं कि वे वाहन को कितने समय तक अपने पास रखना चाहते हैं। उदाहरण के लिए, यदि कोई ग्राहक नई तकनीक या बैटरी में प्रगति के आधार पर पांच या छह वर्षों बाद अपना ईवी अपग्रेड करने की योजना बना रहा है, तो बहुत लंबी कर्ज अवधि चुनना हमेशा सबसे प्रभावी विकल्प नहीं हो सकता। रीपेमेंट अवधि को अनुमानित स्वामित्व अवधि के अनुरूप रखने से अपग्रेड या रीसेल के समय बेहतर वित्तीय लचीलापन मिल सकता है।

यही सिद्धांत कमर्शियल वाहन मालिकों पर भी लागू होता है। ट्रक ऑपरेटरों और छोटे फ्लीट मालिकों के लिए वाहन परिवहन का साधन नहीं, बल्कि आय का स्रोत होता है। लंबी अवधि शुरू में मासिक ईएमआई कम कर सकती है, लेकिन मालिकों को वाहन उपयोग, मौसमी कारोबारी चक्र और अधिक फ्लीट गतिविधि वाले समय में रीपेमेंट का लचीलापन जैसे पहलुओं पर भी विचार करना चाहिए। उदाहरण के लिए, त्योहारों के मौसम, कृषि गतिविधियों या माल ढुलाई की मजबूत मांग वाले समय में कुछ ऑपरेटर भविष्य के ब्याज बोझ को कम करने के लिए आंशिक प्री-पेमेंट करना चुन सकते हैं। संतुलित कर्ज अवधि चुनने से नकदी प्रवाह को बेहतर बनाए रखने और दीर्घकालिक वित्तीय दक्षता बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

साथ ही, वहनीयता व्यावहारिक भी रहनी चाहिए। यदि कम अवधि चुनने से ईएमआई बहुत अधिक हो जाती है, तो कर्ज लेने वाला डाउन पेमेंट थोड़ा बढ़ाने, संतुलित कर्ज अवधि चुनने या जब भी संभव हो आंशिक प्री-पेमेंट करने जैसे विकल्पों पर विचार कर सकते हैं। कर्ज के शुरुआती वर्षों में किए गए छोटे-छोटे प्री-पेमेंट भी कुल ब्याज बोझ कम करने में मदद कर सकते हैं।

मुख्य बात यह है कि कम ईएमआई का अर्थ हमेशा कम कुल लागत नहीं होता। ग्राहकों को प्रत्येक ईएमआई में मूलधन और ब्याज के हिस्से को भी समझना चाहिए। वाहन ऋण को अंतिम रूप देने से पहले केवल मासिक ईएमआई ही नहीं, बल्कि पूरी कर्ज अवधि में देय कुल ब्याज पर भी ध्यान देना महत्वपूर्ण है।

सही तरीके से योजनाबद्ध कर्ज अवधि ग्राहकों को आज की वहनीयता और भविष्य की लंबी अवधि में वित्तीय प्रतिबद्धताओं के बीच बेहतर संतुलन बनाने में मदद कर सकती है।

 

 

 

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