
तिरुवनंतपुरम। अफ्रीका के कुछ हिस्सों में तेजी से फैल रहे इबोला के प्रकोप को लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) द्वारा वैश्विक सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल की घोषणा के बाद केरल ने निगरानी और सार्वजनिक स्वास्थ्य तैयारियों को और तेज कर दिया है। यह आपातकाल घोषणा कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य (डीआरसी) और युगांडा में इबोला के घातक “बुंडीबुग्यो” स्ट्रेन के तेजी से फैलने के बीच की गई है। डब्ल्यूएचओ ने अंतर्राष्ट्रीय स्वास्थ्य विनियम (आईएचआर-2005) का हवाला देते हुए 17 मई को चेतावनी दी कि यह प्रकोप एक गंभीर अंतर्राष्ट्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य खतरा है, जिसमें सीमा पार संचरण का जोखिम भी है।
इसी क्रम में, अफ्रीका रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र (अफ्रीका सीडीसी) ने इस प्रकोप को “महाद्वीपीय सार्वजनिक स्वास्थ्य सुरक्षा आपातकाल” घोषित किया, जिसके चलते अफ्रीकी देशों और वैश्विक स्वास्थ्य एजेंसियों ने युद्धस्तर पर आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र को मजबूत किया। बढ़ती वैश्विक चिंता के बीच, केरल के स्वास्थ्य अधिकारियों ने संदिग्ध मामलों का शीघ्र पता लगाने के लिए हवाई अड्डों और अन्य प्रवेश बिंदुओं पर निगरानी प्रणाली को तेज कर दिया है। प्रभावित क्षेत्रों से आने वाले उन यात्रियों की पहचान पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है जिनमें अस्पष्टीकृत बुखार या वायरल रक्तस्रावी बुखार से जुड़े लक्षण दिखाई देते हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की अंतर्राष्ट्रीय स्वास्थ्य विनियम आपातकालीन समिति, जिसकी बैठक 22 मई को हुई, ने कड़े अस्थायी सुझाव जारी करते हुए देशों से अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डों, बंदरगाहों और सीमा चौकियों पर रोग निगरानी को मजबूत करने को कहा। संगठन ने देशों से इबोला प्रभावित क्षेत्रों की गैर-जरूरी यात्रा को हतोत्साहित करने का भी आग्रह किया।
