सीहोर। खरीफ सीजन से पहले लागू की गई नई ई-टोकन खाद वितरण व्यवस्था को लेकर जिले के किसानों में नाराजगी बढ़ती जा रही है. सरकार ने इस बार खाद वितरण प्रक्रिया को पूरी तरह ऑनलाइन कर फार्मर आईडी से जोड़ दिया है. नई व्यवस्था के तहत किसान अब सीधे दुकानों या सोसायटी से खाद नहीं ले सकेंगे, बल्कि उन्हें पहले ऑनलाइन बुकिंग करनी होगी। लेकिन जिले में अधिकांश किसानों के पास फार्मर आईडी ही नहीं होने से व्यवस्था शुरू होते ही सवालों के घेरे में आ गई है.
किसानों का कहना है कि बोवनी का समय नजदीक है और पहली बारिश के साथ खेतों में काम शुरू हो जाएगा, ऐसे में खाद की जरूरत सबसे अधिक रहती है. बावजूद इसके नई व्यवस्था में तकनीकी और प्रशासनिक समस्याएं किसानों की चिंता बढ़ा रही हैं. किसानों का आरोप है कि सरकार ने जरूरी तैयारियां किए बिना ही योजना लागू कर दी.
जिले के करीब 1 लाख 45 हजार किसानों में से अब तक केवल 13 हजार 445 किसानों के ही फार्मर आईडी कार्ड बन पाए हैं. यानी लगभग 90 प्रतिशत किसान अभी भी इस व्यवस्था से बाहर हैं. कई किसानों की जमीन के रिकॉर्ड आधार से लिंक नहीं हैं, खातों की केवाईसी अधूरी है, वहीं बड़ी संख्या में ऐसे किसान भी हैं जो किराए या मुनाफे पर जमीन लेकर खेती करते हैं. ऐसे मामलों में भूमि स्वामी की फार्मर आईडी अनिवार्य होने से खेती करने वाले किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.
किसानों ने यह भी आरोप लगाया कि पोर्टल पर बार-बार सर्वर डाउन होने से खाद बुकिंग नहीं हो पा रही है. कई बार पर्ची जनरेट होने के बावजूद सोसायटी में खाद उपलब्ध नहीं रहता. वहीं तय तारीख पर खाद नहीं मिलने से ई-टोकन की वैधता समाप्त हो जाती है, जिससे किसानों को दोबारा प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है. किसानों का कहना है कि सरकार पहले सभी किसानों के फार्मर आईडी बनवाने की व्यवस्था सुनिश्चित करे, उसके बाद ही इस प्रकार की अनिवार्य ऑनलाइन प्रणाली लागू की जाए। उनका मानना है कि अचानक लागू की गई व्यवस्था से छोटे और ग्रामीण किसान सबसे अधिक प्रभावित होंगे. इधर, उप संचालक कृषि अशोक उपाध्याय का कहना है कि नई व्यवस्था से खाद की कालाबाजारी पर रोक लगेगी और किसानों को लंबी कतारों में नहीं लगना पड़ेगा। उन्होंने बताया कि गांव-गांव शिविर लगाकर फार्मर आईडी बनाए जा रहे हैं.
