जबलपुर:कण-कण संचय करके व्यक्ति धनवान बनता है। क्षण-क्षण संचय करके व्यक्ति बुद्धिमान बनता है। विद्यार्थियों को निरंतर मेहनत करते रहना है। वकालत के पेशे में संयम बहुत आवश्यक है, कड़ी मेहनत और अभ्यास से कोई भी लक्ष्य पाया जा सकता है। ये बातें मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति द्वारकाधीश बंसल ने रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के विधि विभाग द्वारा आयोजित विशेष व्याख्यान कार्यक्रम के दौरान कहीं।
विशेष व्याख्यान कार्यक्रम में मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति बंसल जी ने मध्यप्रदेश आवास नियंत्रण अधिनियम के मुख्य प्रावधानों को विस्तार से समझाया तथा अपने निजी अनुभवों को भी साझा करते हुए विद्यार्थियों को बताया कि विधि व्यवसाय में अध्ययन निरंतर करते रहना चाहिए तथा किसी भी फाइल को शुरु से अंत तक पढ़ना चाहिए क्योंकि इन्हीं फाइलों में कानून के महत्वपूर्ण बिन्दु छुपे रहते हैं जिससे प्रतिवादी को परास्त किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि अधिवक्ता को एक कुशल अधिवक्ता के रूप में न्यायाधीश एवं प्रतिवादी अधिवक्ता की मनःस्थिति को समझते हुए अपनी बात प्रमुखता से रखनी चाहिए।
साथ ही न्यायालय में उपस्थित होते समय किसी मामले में वाद बिन्दु के सभी पक्षों की गहनता से तैयारी करके आना चाहिए तथा उससे संबंधित सुप्रीम कोर्ट के सुसंगत निर्णयों के दृष्टांत भी देना चाहिए। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलगुरु प्रो. राजेश कुमार वर्मा ने न्यायाधीश बंसल के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए विधि विभाग के छात्र-छात्राआंे का उत्साहवर्धन किया एवं कुलगुरु प्रो. वर्मा ने कहा कि भविष्य में भी न्यायमूर्ति का मार्गदर्शन एवं स्नेह विश्वविद्यालय परिवार को सदैव मिलता रहेगा। कुलसचिव डॉ. रविशंकर सोनवाल ने मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति बंसल को विशेष व्याख्यान हेतु धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम के प्रारंभ में स्वागत उद्बोधन विधि विभागाध्यक्ष एवं संकायाध्यक्ष प्रो. ममता राव ने किया तथा आभार प्रदर्शन प्रो. दिव्या चंसोरिया ने किया।
ये रहे उपस्थित
कार्यक्रम का मंच संचालन विधि विभाग की छात्रा हिमांशी मोरे द्वारा किया। इस अवसर पर विधि विभाग के प्राध्यापकगण डॉ. देवीलता रावत, डॉ. अश्वनी जायसवाल, डॉ. नीना प्यासी, डॉ. सुनील शर्मा, डॉ. सुजाता श्रीवास्तव, डॉ. उमाकांत गजबीर, डॉ. अर्पण शुक्ला, सजल कावडे, सुश्री दिव्या कटर तथा विधि विभाग के समस्त छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
