नीट खत्म करें, राज्यों को 12वीं के अंकों के आधार पर मेडिकल सीटें भरने दें : तमिलनाडु मुख्यमंत्री

चेन्नई, 13 मई (वार्ता) तमिलनाडु विधानसभा में विश्वास मत जीतने के कुछ ही घंटों बाद मुख्यमंत्री और टीवीके अध्यक्ष सी जोसेफ विजय ने बुधवार शाम केंद्र की भाजपा सरकार से नीट परीक्षा खत्म करने की अपील की।

पेपर लीक के आरोपों के बाद परीक्षा रद्द होने को लेकर चल रहे विवाद के बीच उन्होंने मांग की कि राज्यों को 12वीं बोर्ड के अंकों के आधार पर मेडिकल सीटें भरने की अनुमति दी जाए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि नीट लागू होने से ग्रामीण क्षेत्रों, सरकारी स्कूलों, तमिल माध्यम और सामाजिक-आर्थिक रूप से पिछड़े परिवारों के छात्रों को भारी नुकसान हुआ है। इसी का हवाला देते हुए उन्होंने नीट को खत्म करने की राज्य की पुरानी मांग को फिर दोहराया।

उन्होंने मांग की कि राज्यों को एमबीबीएस, बीडीएस और आयुष पाठ्यक्रमों की सभी राज्य कोटा सीटें कक्षा 12वीं के अंकों के आधार पर भरने की अनुमति दी जाए।

यहां जारी बयान में श्री विजय ने बताया कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) ने इस साल तीन मई को 5,432 केंद्रों पर नीट-यूजी परीक्षा आयोजित की थी। अकेले तमिलनाडु के 31 शहरों में यह परीक्षा हुई थी। देशभर से इसमें कुल 22,05,035 अभ्यर्थी शामिल हुए थे, जिनमें तमिलनाडु के लगभग 1.4 लाख छात्र थे।

जांच एजेंसियों के पेपर लीक के आरोपों की जांच के बाद एनटीए ने केंद्र सरकार की मंजूरी से इस परीक्षा को रद्द कर दिया है। अब इस पूरे मामले की जांच का जिम्मा केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दिया गया है।

मुख्यमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि परीक्षा रद्द होने से देश भर के लाखों मेडिकल उम्मीदवारों की उम्मीदें टूट गयी हैं। उन्होंने कहा कि यह पहली बार नहीं है जब नीट की शुचिता से समझौता किया गया है। वर्ष 2024 में भी पेपर लीक हुआ था और छह राज्यों में प्राथमिकी दर्ज की गयी थीं, जिन्हें बाद में सीबीआई को सौंप दिया गया था।

उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के बाद, केंद्र सरकार ने इसरो के पूर्व अध्यक्ष डॉ के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता में विशेषज्ञों की एक उच्च स्तरीय समिति बनायी थी, जिसने सुधार के लिए 95 बिंदुओ वाली विस्तृत सिफारिशें सौंपी थीं। इन सबके बावजूद दो साल के भीतर ही दोबारा पेपर लीक हो गया और परीक्षा रद्द करनी पड़ी।

मुख्यमंत्री विजय ने कहा कि यह राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा में खामियों और ढांचागत कमियों का ठोस प्रमाण है।उन्होंने कहा कि तमिलनाडु सरकार शुरुआत से ही लगातार और सर्वसम्मति से नीट का विरोध करती रही है। इसकी वजह यह है कि इस परीक्षा ने ग्रामीण क्षेत्रों, सरकारी विद्यालयों, तमिल माध्यम और सामाजिक-आर्थिक रूप से पिछड़े परिवारों के छात्रों को भारी नुकसान पहुंचाया है।

उन्होंने नीट को खत्म करने की लंबे समय से लंबित मांग को फिर से दोहराते हुए केंद्र से मांग की कि राज्यों को एमबीबीएस, बीडीएस और आयुष पाठ्यक्रमों की सभी राज्य कोटा सीटें 12वीं के अंकों के आधार पर भरने की अनुमति दी जाए।

 

 

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