सत्रहवीं तमिलनाडु विधानसभा का पहला सत्र शुरू, विजय, उदयनिधि और ईपीएस ने ली सदस्य पद की शपथ

चेन्नई, 11 मई (वार्ता) तमिलनाडु की 17वीं विधानसभा का पहला सत्र सोमवार को शुरू हुआ, जिसमें नवनिर्वाचित विधायकों को सदस्य के रूप में शपथ दिलाई गई।

इस दौरान मुख्यमंत्री और तमिलगा वेट्री कज़गम (टीवीके) के संस्थापक सी. जोसेफ विजय ने भी सदन के सदस्य के रूप में शपथ ली। पूर्वाह्न 9:30 बजे सदन की कार्यवाही शुरू होते ही प्रोटेम स्पीकर एम. वी. करुप्पैया ने एक तिरुक्कुरल का पाठ किया और विधानसभा रजिस्टर पर हस्ताक्षर किए। जिन्हें रविवार शाम राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर ने शपथ दिलाई थी।

इसके बाद उन्होंने मुख्यमंत्री, उनके मंत्रिमंडल सहयोगियों, विपक्ष के नेता, डीएमके के उधयनिधि स्टालिन, पूर्व मुख्यमंत्री एडप्पडी के. पलानीस्वामी और ओ. पन्नीरसेल्वम सहित अन्य सदस्यों को चुनाव प्रमाण पत्र प्रस्तुत कर शपथ लेने के लिए आमंत्रित किया। अन्य विधायकों ने वर्णमाला क्रम में एक-एक कर शपथ ली। नौ नए मंत्रियों में से आठ ने शपथ ली, जबकि एकमात्र महिला विधायक एस. कीर्तन अपना प्रमाणपत्र लाना भूल गईं, इसलिए उन्हें बाद में शपथ दिलाई जाएगी।

234 सदस्यीय विधानसभा में 233 विधायकों ने शपथ ली। एक सीट खाली रही क्योंकि श्री विजय ने दो सीटों से जीतने के बाद तिरुचि पूर्व सीट से इस्तीफा देकर पेरंबूर सीट बरकरार रखी। शपथ प्रक्रिया शाम तक जारी रहने के बाद सदन को दिनभर के लिए स्थगित कर दिया जाएगा।

कार्यवाही मंगलवार को फिर शुरू होगी, जब स्पीकर और उपाध्यक्ष के चुनाव होंगे। इसके बाद 13 मई को मुख्यमंत्री विजय सदन में अपना बहुमत साबित करेंगे, जैसा कि राज्यपाल ने सरकार गठन के समय निर्देश दिया था।

श्री विजय ने राजनीति में उतरने के महज दो वर्षों के भीतर 108 सीटें जीतकर बड़ी सफलता हासिल की और तमिलनाडु की राजनीति में एक नया दौर शुरू किया। इससे द्रमुक और अन्नाद्रमुक के छह दशकों पुराने वर्चस्व का अंत हुआ। हालांकि टीवीके के पास तकनीकी रूप से 107 विधायक हैं और बहुमत से 11 सीटें कम थीं लेकिन द्रमुक के कुछ सहयोगी दलों के समर्थन से श्री विजय ने राज्यपाल से मिलकर सरकार बनाने का दावा पेश किया, जिससे एक सप्ताह से चला राजनीतिक गतिरोध समाप्त हुआ।

कांग्रेस ने द्रमुक से अलग होकर टीवीके को समर्थन दिया और अपने पांच विधायकों का समर्थन दिया। वहीं भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा), मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा), वीसीके और आईयूएमएल ने बाहरी समर्थन दिया और सरकार में शामिल नहीं होने का निर्णय लिया।

कांग्रेस के भी सरकार में शामिल होने की संभावना है और उसके दो विधायकों को मंत्रिमंडल विस्तार के दौरान शामिल किया जा सकता है। इससे तमिलनाडु में पहली बार गठबंधन सरकार बनेगी। साथ ही, 1967 के बाद पहली बार कांग्रेस राज्य की सरकार का हिस्सा बन सकती है।

 

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