ढाका | बांग्लादेश के उच्च न्यायालय ने रविवार को हिंदू संत ब्रह्मचारी चिन्मय कृष्ण दास की जमानत याचिका को सिरे से खारिज कर दिया है। चिन्मय दास वर्तमान में साल 2024 में चटगांव में एक कनिष्ठ सरकारी अभियोजक, सैफुल इस्लाम अलीफ की हत्या के मामले में मुकदमे का सामना कर रहे हैं। अदालत में सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति के.एम. जाहिद सरवर और न्यायमूर्ति शेख अबू ताहिर की पीठ ने स्पष्ट किया कि निचली अदालत में गवाहों के बयान दर्ज करने की प्रक्रिया अभी जारी है, इसलिए इस स्तर पर जमानत देना उचित नहीं होगा। उनके वकील अपूर्व कुमार भट्टाचार्य ने बताया कि उच्च न्यायालय अब सोमवार को दास के खिलाफ दर्ज चार अन्य मामलों में जमानत याचिकाओं पर सुनवाई करेगा।
यह पूरा विवाद पिछले साल चटगांव में हुए हिंसक विरोध प्रदर्शनों से जुड़ा है, जहां संत की गिरफ्तारी के बाद उनके अनुयायियों और सुरक्षाबलों के बीच झड़प हुई थी। इसी हिंसा के दौरान वकील सैफुल इस्लाम की हत्या कर दी गई थी। चटगांव संभागीय त्वरित सुनवाई न्यायाधिकरण ने इस साल 19 जनवरी को इस्कॉन के पूर्व पदाधिकारी चिन्मय दास सहित 38 अन्य लोगों के खिलाफ हत्या के आरोप तय कर मुकदमा शुरू किया था। दास के वकीलों ने कोर्ट में उनकी खराब सेहत और लंबे समय से जेल में रहने का हवाला देकर राहत मांगी थी, जिसे अदालत ने स्वीकार नहीं किया।
गौरतलब है कि चिन्मय कृष्ण दास के संगठन ‘सम्मिलितो सनातन जागरण जोत’ ने बांग्लादेश में तख्तापलट के बाद हिंदू समुदाय पर हुए हमलों और भेदभाव के खिलाफ देशव्यापी रैलियां आयोजित की थीं। वर्ष 2024 में शेख हसीना सरकार के गिरने के बाद अल्पसंख्यकों की सुरक्षा का मुद्दा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में रहा है। इससे पहले दास पर राजद्रोह और राष्ट्रीय ध्वज के अपमान के आरोप भी लगे थे, जिनमें उन्हें मिली जमानत पर उच्चतम न्यायालय ने रोक लगा दी थी। बांग्लादेश की करीब 17 करोड़ की आबादी में लगभग आठ प्रतिशत हिंदू हैं, जो इस कानूनी लड़ाई और दास की सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता व्यक्त कर रहे हैं।

