नई दिल्ली | प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देशवासियों से सोना न खरीदने, विदेश यात्रा टालने और पेट्रोल-डीजल का कम उपयोग करने की अपील पर नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने तीखा हमला बोला है। राहुल गांधी ने पीएम मोदी को “कंप्रोमाइज्ड” (समझौतावादी) करार देते हुए कहा कि ये सुझाव नहीं, बल्कि सरकार की विफलता का स्पष्ट प्रमाण हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट के जरिए केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि 12 वर्षों के शासन के बाद देश ऐसी स्थिति में आ गया है कि अब जनता को अपनी बुनियादी जरूरतों और इच्छाओं में कटौती करने की सलाह दी जा रही है। राहुल ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री अपनी जवाबदेही से बचने के लिए सारा बोझ आम जनता के कंधों पर डाल रहे हैं।
कांग्रेस पार्टी ने भी प्रधानमंत्री के बयान को ‘बेशर्म और गैरजिम्मेदाराना’ बताया है। पार्टी का तर्क है कि अमेरिका-ईरान संघर्ष के तीन महीने बाद भी सरकार भारत की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कोई ठोस आकस्मिक योजना (Contingency Plan) बनाने में विफल रही है। विपक्षी दलों का कहना है कि वैश्विक संकट से अर्थव्यवस्था को बचाने के बजाय सरकार नागरिकों को असुविधा में धकेल रही है। राहुल गांधी ने तंज कसते हुए कहा कि प्रधानमंत्री अब जनता को यह बता रहे हैं कि उन्हें क्या खरीदना चाहिए और कहां जाना चाहिए, जो यह दर्शाता है कि सत्ता पर उनकी पकड़ कमजोर हो चुकी है और वे देश चलाने में अब सक्षम नहीं हैं।
इससे पहले, हैदराबाद में एक रैली को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने पश्चिम एशिया संकट के कारण बढ़ती पेट्रोल और उर्वरकों की कीमतों का हवाला दिया था। उन्होंने विदेशी मुद्रा भंडार को बचाने और अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिए नागरिकों से एक वर्ष तक सोने की खरीद और विदेश यात्रा स्थगित करने का आह्वान किया था। पीएम ने कारपूलिंग, मेट्रो का उपयोग, इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने और ‘वर्क फ्रॉम होम’ जैसे तरीकों को फिर से अपनाने का सुझाव दिया। प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव होने के कारण देशहित में कुछ कड़े संकल्प लेना अनिवार्य है, ताकि भारत आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ सके और विदेशी मुद्रा की बचत हो सके।

