54 वार्ड, 1000 सफाई मित्र और एक लक्ष्य, उज्जैन को बनाना नंबर वन

उज्जैन:मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का गृह नगर इन दिनों एक नए संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है. बाबा महाकाल की नगरी अब केवल धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि स्वच्छता के क्षेत्र में भी देशभर में अपना परचम लहराने की तैयारी कर रही है. सवाल यह उठ रहा है कि क्या स्वच्छता सर्वेक्षण 2026 में उज्जैन देश का नंबर वन शहर बनकर इंदौर को कड़ी चुनौती दे पाएगा?

उज्जैन नगर निगम आयुक्त अभिलाष मिश्रा के नेतृत्व ने स्वच्छता को जनआंदोलन का रूप दिया गया है. आयुक्त स्वयं प्रतिदिन सुबह 6 बजे शहर की सड़कों पर निकल पड़ते हैं. स्टैंडअप मीटिंग के माध्यम से सफाई व्यवस्था की समीक्षा की जाती है और मौके पर ही अधिकारियों तथा कर्मचारियों को आवश्यक निर्देश दिए जाते हैं. शहर के सभी 54 वार्डों में करीब 1000 सफाई मित्र और स्वास्थ्य कर्मी तैनात किए गए हैं. हर वार्ड की अलग-अलग रैंकिंग तैयार की जा रही है ताकि स्वस्थ प्रतिस्पर्धा के माध्यम से स्वच्छता स्तर को और बेहतर बनाया जा सके.

5100 तक जुर्माना
नगर निगम ने साफ संदेश दिया है कि अब शहर को गंदा करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा. यदि कोई व्यक्ति सड़क, गली या सार्वजनिक स्थान पर कचरा फेंकता हुआ पाया जाता है तो उसके खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जा रही है. कचरे की जांच कर उसमें मिले दस्तावेजों के आधार पर संबंधित व्यक्ति या प्रतिष्ठान तक पहुंचा जा रहा है. इसके बाद 5100 तक का जुर्माना वसूला जा रहा है। कई मामलों में पंचनामा बनाकर कानूनी कार्रवाई भी की जा रही है.

सीसीटीवी से निगरानी
शहर के विभिन्न हिस्सों में सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से निगरानी की जा रही है. जहां भी कचरा फैलता दिखाई देता है, वहां तत्काल टीम भेजी जाती है. सफाई व्यवस्था की लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है और नागरिकों से फीडबैक भी लिया जा रहा है. व्यापारियों, रहवासियों और संस्थानों को निर्धारित स्थानों पर ही कचरा डालने के लिए प्रेरित किया जा रहा है. नगर निगम का मानना है कि स्वच्छता केवल प्रशासनिक प्रयासों से नहीं, बल्कि जनभागीदारी से ही संभव है।

होम कंपोस्टिंग को बढ़ावा
गीले कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन के लिए नागरिकों को होम कंपोस्टिंग के लिए प्रेरित किया जा रहा है. घरों और संस्थानों में जैविक कचरे से खाद बनाने की पहल तेज की गई है. इससे न केवल कचरे की मात्रा कम होगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण को भी बल मिलेगा.

गलियों का सौंदर्यीकरण
स्वच्छता के साथ-साथ शहर की सुंदरता बढ़ाने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है. बैकलेन और गलियों की सफाई के बाद वहां आकर्षक पेंटिंग और रंग-रोगन कराया जा रहा है. इससे शहर की छवि और अधिक आकर्षक बन रही है.

स्वच्छता में शक्ति, उज्जैन की भक्ति
‘स्वच्छता में शक्ति, उज्जैन की भक्ति’ अभियान के माध्यम से सफाई मित्रों, सामाजिक संगठनों, व्यापारियों और आम नागरिकों को जोड़ा जा रहा है. नगर निगम का उद्देश्य है कि सिंहस्थ 2028 से पहले उज्जैन एक आदर्श ग्रीन सिटी और क्लीन सिटी के रूप में स्थापित हो.

सिंहस्थ से पहले संदेश
उज्जैन में महाकुम्भ की तैयारियों के बीच उज्जैन का स्वच्छता अभियान और भी महत्वपूर्ण हो गया है. करोड़ों श्रद्धालु जब महाकाल मंदिर और क्षिप्रा के तट पर पहुंचेंगे, तब उन्हें एक स्वच्छ, सुंदर और सुव्यवस्थित शहर देखने को मिले- यही निगम प्रशासन का लक्ष्य है.

क्या उज्जैन बनेगा देश का नंबर वन
धार्मिक आस्था, प्रशासनिक इच्छाशक्ति और जनभागीदारी- इन तीनों का अद्भुत संगम उज्जैन में दिखाई दे रहा है. यदि यही गति और सख्ती बनी रही तो वह दिन दूर नहीं जब महाकाल की नगरी स्वच्छता के क्षेत्र में नया इतिहास रचते हुए देश के शीर्ष शहरों में अपना स्थान बना लेगी. अब पूरे प्रदेश की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या मुख्यमंत्री के गृह नगर उज्जैन की यह स्वच्छता मुहिम 2026 में उसे देश का नंबर वन शहर बना पाएगी और क्या यह शहर स्वच्छता की राजधानी कहे जाने वाले इंदौर को कड़ी टक्कर देगा

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