जबलपुर: माँ सेवा, ममता , त्याग और सदभावना जैसे उच्च गुणों की सजीव प्रतिमा है। वर्तमान दौर में उसके जीवन को ध्यान , साधना और आध्यात्म का सम्बल दे कर विकसित और परिष्कृत कर दिया जाए तो उसके स्नेह और सानिध्य से और भी अधिक संस्कारवान, चरित्रवान समाज के सम्बल ( चरित्रवान नागरिक) तैयार हो सकते है। उक्त विचार ब्रह्माकुमारी विमला दीदी जी ने प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के शिव उपहार भवन, प्रेमनगर सेवा केंद्र में मातृ दिवस के अवसर पर मातृ शक्तियों के सम्मान हेतु आयोजित कार्यक्रम – माँ सुखी परिवार की आधार शिला में व्यक्त किये।
आपने आगे कहा कि माताओ की आज जिम्मेवारी है कि वे स्वयं को मैडिटेशन के माध्यम से सशक्त कर के ऐसा माहौल प्रदान करे जो उन्हें केवल भौतिक और आर्थिक रूप से ही सक्षम नहीं बनाये बल्कि मानसिक, भावनात्मक और सामाजिक रूप से भी सशक्त बना कर के ऐसा व्यक्तित्व प्रदान करे जो वे अपने जीवन की कठिन परिस्थितियों का सामना धैर्य और आत्मविश्वास के साथ कर सके।
कार्यक्रम का विधिवत दीप प्रज्जवन कर के उदघाटन कदम संस्था की सीमा चतुर्वेदी जी , विक्टोरिया अस्पताल की निशा विश्वकर्मा जी, एजुकेटर परवीन लाम्बा जी, एजुकेटर नीता नथानी जी, एजुकेटर अंजना मिश्रा जी, उद्यमी सुरभि बोस जी, तथा ब्रह्माकुमारी विमला दीदी जी और अन्य बहनो ने किया।सीमा चतुर्वेदी ने कहा कि जिस तरह से एक पौधे को रोपने के बाद उसका ध्यान रखना होता है कि वह उचित रीति बढ़ सके, ऐसे ही माता अपने बालक बालिका की परवरिश करते समय उनके अंदर अच्छे संस्कार का रोपण कर सकती है , बचपन में दिए संस्कार के आधार ही वह आने वाले जीवन में निर्णय ले कर समाज को अपना योगदान दे सकता है।
एजुकेटर नीता नथानी ने कहा कि माता बच्चे की पहली शिक्षक होती है, माता अगर सशक्त है तो आने वाली पीढ़ीओ को भी सशक्त बना देती है , हमारे सामने ऐसे अनेक उदाहरण है जहा पर माताओ ने अपने बच्चो में बचपन से ही नैतिकता और देश प्रेम के गुणों की नींव डाली जो आगे चल कर के प्रखर रूप से प्रगट हुई। ऐसे कार्यक्रम के लिए ब्रह्माकुमारीज संस्था बधाई की पात्र है।
कार्यक्रम में उपस्थित मातृ शक्तियों का सम्मान किया गया। कार्यक्रम का सफल संचालन ब्रह्माकुमारी विनीता दीदी ने किया। कार्यक्रम के आयोजन में पूजा दीदी , प्राची दीदी , मधु दीदी , संगीता दीदी का विशेष सहयोग रहा।
