ग्वालियर में रेबीज का कहर, सातवीं मौत, लोगों में दहशत

ग्वालियर। जयारोग्य चिकित्सालय के मेडिसिन विभाग में भर्ती एक युवक की आज शनिवार को रेबीज से मौत हो गई। मृतक की पहचान महाणिक की गोठ राक्सी पुल निवासी 36 वर्षीय राजू कुशवाह के रूप में हुई है, जिसे 28 अप्रैल को अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

परिजनों के अनुसार, राजू को घर के बाहर कुत्ते ने काट लिया था, जब वह उसे खाना खिला रहे थे। उस समय केवल टिटनेस का इंजेक्शन लगवाया गया था, लेकिन एंटी-रेबीज वैक्सीन नहीं लगवाई गई। करीब 20 दिन बाद उनमें रैबीज के लक्षण दिखाई देने लगे, जिनमें पानी से डरना और पानी न पी पाना शामिल था। हालत बिगड़ने पर उन्हें हजार बिस्तर अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया।

*तीन महीने में सात की मौत हुई*

ग्वालियर में पिछले तीन महीनों में रेबीज के मामलों में तेजी आई है। इस अवधि में आठ लोग इसकी चपेट में आए, जिनमें से अब तक सात की मौत हो चुकी है। पहले हुई मौतों में ग्वालियर की किरण, टीकमगढ़ की 65 वर्षीय सेवाई बाई, दतिया के 6 वर्षीय हंस प्रजापति, छतरपुर के अशोक, मुरार के गोलू और सबलगढ़ के 21 वर्षीय सूरज शामिल हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि रेबीज एक जानलेवा और लगभग लाइलाज बीमारी है। जीआरएमसी के पीएसएम विभाग के डॉ. अक्षत पाठक के अनुसार, कुत्ते या बिल्ली के काटने पर तुरंत सरकारी अस्पताल में एंटी-रेबीज वैक्सीन लगवाना जरूरी है, जहां कोल्ड चेन का सही पालन होता है। यदि घाव गहरा हो, तो इम्युनोग्लोबिन का इंजेक्शन भी लगाया जाता है।

शनिवार को जेएएच के हजार बिस्तर अस्पताल में कुल 132 मामले पहुंचे, जिनमें 42 नए और 90 पुराने केस शामिल थे। जिला अस्पताल और सिविल अस्पताल हजीरा में भी रोजाना करीब 100 मरीज कुत्ते के काटने के इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। ऐसा ही आंकड़ा ग्वालियर के मुरार जिला अस्पताल और हजीरा सिविल अस्पताल में भी रहता है।

*5 महीने में कुत्ते काटने की 13 हजार से अधिक केस*

अगर कुत्ते काटने की घटनाओं की बात करें तो शहर में दिसंबर से लेकर अप्रैल तक इनकी संख्या 13579 हो चुकी है। जिसमें जयारोग्य अस्पताल के डॉग विभाग में 6057 कुत्ते काटने के मरीज आए थे, मुरार जिला अस्पताल में 3772 कुत्ते काटने के मरीज पहुंचे थे वहीं हजीरा सिविल अस्पताल में 3750 मैरिज कुत्ते काटने के पहुंचे थे। शहर के गली, मोहल्ले,चौराहा और सड़कों पर कुत्तों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। सुबह मॉर्निंग वॉक पर निकलने बुजुर्ग महिला और युवा लोग भी काम निकल रहे हैं। अगर वह निकलते भी हैं तो उनके हाथों में कुत्तों को भगाने के लिए एक डंडा हर वक्त मौजूद रहता है।

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