
श्योपुर। जीवन केवल सांस लेने का नाम नहीं है, बल्कि विपरीत परिस्थितियों में भी मुस्कुराते हुए आगे बढ़ने का नाम ‘जीवटता’ है। जीवटता का अर्थ है – हार न मानना, संघर्षों से जूझना और हर असफलता को सफलता की सीढ़ी बनाना। यह एक मानसिक शक्ति है जो व्यक्ति को गिरने के बाद फिर से उठने और उड़ने का हौसला देती है। ओर प्रखर साहित्यकार, शायर एवं वरिष्ठ पत्रकार प्रभात प्रणय भी ऐसे ही जीवटता वाले इंसान हैं जो मौत को आंख दिखाकर वापस आए हैं। और आने के बाद उन्होंने दो किताबैं लिखी और आज उनका विमोचन किया जा रहा है। यह बात पूर्व मंत्री रामनिवास रावत ने मुस्लिम सामुदायिक भवन जमातखाना में गजलकार ओर वरिष्ठ पत्रकार प्रभात प्रणय द्वारा लिखित किताबें “जिंदगी पैरोल पर” एवं “चार में सार” का विमोचन तथा प्रभात प्रणय के सम्मान में आयोजित कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि संबोधन देते हुए कही।
समारोह में अध्यक्षता करने भोपाल से श्योपुर पहुंचे मध्यप्रदेश हज कमेटी के अध्यक्ष कैबिनेट मंत्री दर्जा रफत वारसी ने कहा कि वह स्टूडेंट्स लाइफ़ से ही प्रभात जी से प्रेरित रहे हैं। जिस तरह उन्होंने राष्ट्रवादी विचारधारा से ओतप्रोत होकर काव्यपाठ किया, खासकर उर्दू अदब के क्षेत्र में अपना विशेष योगदान देने में सफल रहे वो उनकी विलक्षण प्रतिभा को दर्शाता है। पत्रकारिता के क्षेत्र में जिस तरह उन्होंने निडर और निष्पक्ष होकर काम किया उसका अनुसरण सभी पत्रकार करें। भाजपा जिलाध्यक्ष शशांक भूषण, पूर्व विधायक दुर्गा लाल विजय, वरिष्ठ भाजपा नेता कैलाश नारायण गुप्ता ने भी विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल होकर संबोधन दिए। कार्यक्रम का संचालन मध्यप्रदेश साहित्य परिषद के पदाधिकारी डॉ लोकेश तिवारी ने व आभार प्रदर्शन प्रीति भटनागर ने किया। इससे पहले स्वागत भाषणों इंसाफ कुरैशी ने दिया व प्रभात जी के जीवन वृत पर प्रकाश डॉ अशफ़ाक अर्शी द्वारा डाला गया। कार्यक्रम की शुरुआत सरस्वती पूजन ओर सरस्वती वंदना के साथ हुई।
*विभिन्न संगठनों ने किया सम्मान*
इस दौरान विभिन्न सामाजिक साहित्यिक संस्थाओं ने भी प्रभात प्रणय का सम्मान किया। इस क्रम में मुस्लिम समाज की ओर से शहर काजी अतीक उल्लाह कुरैशी ने, वक्फ इंतजामिया कमेटी जमातखाना की ओर से कमेटी के सदर इंसाफ कुरैशी ने, श्रमजीवी पत्रकार संघ की ओर से जिलाध्यक्ष दीपक दंडोतिया ओर उनकी टीम ने, प्रेस क्लब श्योपुर की ओर से जिलाध्यक्ष अखिल भदौरिया, प्रेस मीडिया पत्रकार कल्याण संघ की ओर से भारत भूषण ने, साहित्य परिषद उर्दू की ओर से वरिष्ठ शायर डॉ अशफ़ाक अर्शी ने प्रभातजी का माला पहनाकर शोल ओढ़ाकर व प्रशस्ति पत्र देकर सम्मान किया।
