सीबीआई की अदालत ने बीओआई के पूर्व प्रबंधक और उसके सहयोगी को सात साल की सजा सुनाई

नयी दिल्ली, 02 अप्रैल (वार्ता) मध्य प्रदेश के भोपाल में केंद्रीय जांच ब्यूरो की एक विशेष अदालत ने बैंक धोखाधड़ी के मामले में बैंक ऑफ इंडिया (बीओआई) के पूर्व वरिष्ठ शाखा प्रबंधक और उसके सहयाेगी को सात साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई है।

अदालत ने जेल की सजा सुनाते हुए दोनों आरोपियों-पीयूष चतुर्वेदी (जो उस समय बीओआई की मिसरोद शाखा, भोपाल के वरिष्ठ शाखा प्रबंधक थे) और मोहन सिंह सोलंकी (एक निजी व्यक्ति) पर 60,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया।

सीबीआई ने 2016 में बीओआई के क्षेत्रीय कार्यालय, भोपाल के तत्कालीन उप क्षेत्रीय प्रबंधक द्वारा दायर एक लिखित शिकायत के आधार पर यह मामला दर्ज किया था। आरोप था कि पीयूष चतुर्वेदी ने धोखाधड़ी और बेईमानी से ‘विजन कम्प्यूटर’ के नाम पर 27 लाख रुपये का सावधि ऋण मंजूर किया था।

ऋण मंजूर करने के बाद चतुर्वेदी ने अपने सह-आरोपी मोहन सिंह सोलंकी के साथ मिलकर साजिश रची और ऋण की रकम एम/एस अजब कुमार इंडस्ट्रीज के खाते में स्थानांतरित कर दी। इस कंपनी की मालिक श्रीमती कृष्णा बाई सोलंकी (मोहन सिंह सोलंकी की पत्नी) थीं। इसके बाद आरोपियों ने उस रकम का गबन कर लिया, जिससे बैंक को गलत तरीके से नुकसान हुआ और उन्हें गलत तरीके से फायदा पहुंचा।

सीबीआई ने जांच पूरी होने के बाद आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दायर किया। अदालत ने सुनवाई के बाद दोनों आरोपियों को दोषी ठहराया और उन्हें सजा सुनाई।

 

 

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