
जबलपुर। देश के सभी श्रम संगठनों द्वारा श्रम विरोधी, नियोक्ता समर्थक नई चार श्रम संहिताओं के विरोध में बुधवार को काला दिवस मनाकर विरोध किया गया है। मध्यप्रदेश विद्युत कर्मचारी संघ फेडरेशन के महामंत्री राकेश डी पी पाठक ने कहा कि नई चार श्रम संहिताएं देश के श्रमिकों जो संपत्ति के वास्तविक सृजनकर्ता है उन्हें फिर औपनिवेशिक काल जैसी शोषणकारी परिस्थितियों में धकेलने का प्रयास है। श्री पाठक ने कहा कि इनमें ऐसे कठोर और दमनकारी प्रावधान है। जिससे यूनियन बनाना अब कठिन, पंजीकरण मुश्किल और निरस्तीकरण आसान हो जाएगा। कार्य समय-सीमा को खुला छोड़ दिया गया है, जिससे उसे मनमाने ढंग से बढ़ाया जा सके। फिक्स्ड टर्म रोजगार को सामान्य बनाया जा रहा है, मौजूदा सामाजिक सुरक्षा कानूनों को कमजोर किया जा रहा है। सुरक्षा मानकों से समझौता किया जा रहा है। न्यूनतम वेतन कानून को कमजोर किया जा रहा है। राकेश डी पी पाठक ने कहा कि इन चार नई श्रम संहिताओं से श्रमिकों, कार्मिकों का हित संवर्धन नहीं बल्कि उत्पीडऩ होगा। वहीं प्रशासन, प्रबंधन और उघोग पतियो का हित संवर्धन होगा। मप्र विद्युत कर्मचारी संघ फेडरेशन ने इनके विरोध में काला दिवस मनाया जिसमें फेडरेशन के कर्मचारी गण उपस्थित थे। मध्यप्रदेश में नियमित कर्मचारियों के साथ पेंशनर्स को भी महंगाई राहत, परिवार पेंशन राहत दी जाएं। राज्य बंटवारे की धारा 49 को समाप्त किया जाए। यह धारा वर्ष 2000 के बाद सेवानिवृत्त हुए कर्मचारियों पर लागू नहीं होती है किन्तु राज्य सरकार के कुछ अधिकारियों की मनमानी से लाखों पेंशनर्स परेशान हो रहे हैं और उनका आर्थिक शोषण हो रहा है। मध्यप्रदेश विधुत कर्मचारी संघ फेडरेशन महामंत्री राकेश डी पी पाठक, यूके पाठक, दिनेश दुबे, अनूप वर्मा, उमाशंकर दुबे, अवनीश तिवारी, राजेश मिश्रा, रवि चौबे, श्रीकांत दुबे, डी के चतुर्वेदी, अजय चौबे, योगेश पटेल, मोहित पटेल, मनोज पाठक, दिलीप पाठक, संजय सिंह सहित बड़ी संख्या में फेडरेशन के साथियों, कर्मचारी गणों ने इस काले कानून का विरोध किया।
