ईरान होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों के लिए पारगमन शुल्क प्रणाली लाने की तैयारी में

तेहरान, 30 मार्च (वार्ता) ईरान सामरिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य पर कड़ा नियंत्रण करने की तैयारी में है। ईरानी सांसद एक ऐसा विधेयक लाने की कोशिश कर रहे हैं जो पारगमन शुल्क (ट्रांजिट टोल) और गुजरने वाले जहाजों के लिए अनिवार्य मंजूरी सहित एक नई नियामक प्रणाली पेश करेगा।वरिष्ठ ईरानी सांसद अलाउद्दीन बोरुजेर्दी ने कहा कि इस कानून को ईरानी संसद (मजलिस) द्वारा ‘जल्द ही’ मंजूरी मिलने की उम्मीद है। उन्होंने चेतावनी दी कि कानून लागू होने के बाद ईरान की अनुमति के बिना किसी भी जहाज को इस महत्वपूर्ण जलमार्ग से गुजरने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
प्रस्तावित कानून के तहत, जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों को सुरक्षा और संबंधित सेवाओं के बदले शुल्क देना होगा। एसएनएन टीवी चैनल ने उनके हवाले से कहा, “होर्मुज जलडमरूमध्य पर हमारा पूर्ण नियंत्रण है। मजलिस द्वारा विधेयक अपनाए जाने के बाद जल्द ही एक नई प्रणाली इस जलमार्ग को नियंत्रित करेगी। विधेयक में निर्धारित जलडमरूमध्य से गुजरने के शुल्क के माध्यम से जहाजों के लिए सुरक्षा और सेवाएं सुनिश्चित की जाएंगी।”

सांसद का बयान दुनिया के सबसे व्यस्त ऊर्जा गलियारों में से एक के प्रबंधन के तरीके में बड़े बदलाव का संकेत देता है। यह कदम ईरानी संसद की नागरिक मामलों की समिति के अध्यक्ष मोहम्मद रजा रजाई कूची की पिछली टिप्पणियों के बाद आया है, जिन्होंने पुष्टि की थी कि पारगमन शुल्क लगाने का कानून प्रक्रिया में है। होर्मुज जलडमरूमध्य पश्चिमी एशिया में चल रहे युद्ध की पृष्ठभूमि में भू-राजनीतिक तनाव का केंद्र बना हुआ है। इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि वह खर्ग द्वीप पर कब्जा करना पसंद करेंगे, जो एक महत्वपूर्ण द्वीप है और जहाँ से ईरान का 90 प्रतिशत तेल गुजरता है।
श्री बोरुजेर्दी ने ईरान के परमाणु रुख को कड़ा करने का भी संकेत दिया और कहा कि ईरान के लिए परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) से हटने का ‘समय आ गया है’। उन्होंने तर्क दिया कि अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरानी परमाणु सुविधाओं पर हाल के हमलों के बाद यह समझौता अपनी प्रासंगिकता खो चुका है।

होर्मुज से संबंधित इस प्रस्तावित कानून की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कड़ी आलोचना हो रही है। संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के प्रौद्योगिकी मंत्री सुल्तान अहमद अल जाबेर ने चेतावनी दी है कि होर्मुज जलडमरूमध्य को ‘हथियार’ बनाने का कोई भी प्रयास ‘आर्थिक आतंकवाद’ के समान होगा, जिसके वैश्विक उपभोक्ताओं के लिए दूरगामी परिणाम होंगे। उन्होंने कहा, “जब ईरान होर्मुज पर नियंत्रण स्थापित करेगा, तो हर देश को इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी।” ईरान ने यह भी कहा कि मौजूदा संघर्ष ने उसकी सांस्कृतिक विरासत को नुकसान पहुँचाया है। इस युद्ध के दौरान कम से कम 131 ऐतिहासिक स्थल और 64 पर्यटन स्थल क्षतिग्रस्त हुए हैं।

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