जबलपुर:मप्र हाईकोर्ट के जस्टिस एमएस भट्टी की एकलपीठ ने महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय की प्रारंभिक नियुक्ति को चुनौती देने वाले मामले को गंभीरता से लिया। न्यायालय ने मामले में राज्य शासन सहित अन्य को नोटिस जारी कर जवाब पेश करने के निर्देश दिये है. यह मामला याचिकाकर्ता रिसर्च स्कालर सुभाष चंद्र यादव की ओर से दायर किया गया है। जिनकी ओर से अधिवक्ता प्रवीण ज्योति वर्मा ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि डॉ. रमेश चंद्र त्रिपाठी प्रोफेसर जीव विज्ञानद्ध महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय की प्रारंभिक नियुक्ति चुनौती के योग्य है। ऐसा इसलिए क्योंकि उक्त नियुक्ति विधिवत विज्ञापन के बिना की गई थी, जो स्थापित चयन प्रक्रिया व नियमों के विपरीत है।
इसके अतिरिक्त संबंधित प्रोफेसर को अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद के पोर्टल पर असंगत रूप से कभी फूड इंजीनियरिंग तो कभी सिविल इंजीनियरिंग के अंतर्गत प्रदर्शित किया गया, जबकि उनकी मूल विषय वस्तु जीव विज्ञान है। यह तथ्यों के विपरीत भ्रामक प्रस्तुतिकरण है। विश्वविद्यालय प्रशासन, विशेषकर कुलपति स्तर पर, पूर्व में भी कई मामलों में न्यायालय के आदेशों की अवहेलना की गई है, जिनके संबंध में न्यायालय में वाद लंबित हैं। इस संदर्भ को भी वर्तमान याचिका में महत्वपूर्ण आधार के रूप में प्रस्तुत किया गया है। सुनवाई पश्चात् न्यायालय ने अनावेदकों को नोटिस जारी कर जवाब पेश करने के निर्देश दिये है।
