बीजिंग, 14 मार्च (वार्ता) चीन ने लकवाग्रस्त व्यक्तियों के हाथों में जान डालने में मदद के लिए डिज़ाइन किए गए दुनिया के पहले ‘ब्रेन इम्प्लांट’ को व्यावसायिक उपयोग के लिए आधिकारिक मंजूरी दे दी है। यह उपलब्धि हासिल करने वाला चीन दुनिया का पहला देश बन गया है। इस डिवाइस को चीनी कंपनी ‘न्यूरैकल मेडिकल टेक्नोलॉजी’ ने विकसित किया है और यह ‘ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफेस’ तकनीक पर आधारित है। यह डिवाइस मुख्य रूप से उन वयस्कों (18 से 60 वर्ष) के लिए है जो गर्दन में रीढ़ की हड्डी की गंभीर चोट के कारण लकवे का शिकार हो गए हैं। बीसीआई तकनीक, किसी इंसान के तंत्रिका तंत्र को ऐसे उपकरणों से जोड़ती है जो मस्तिष्क की गतिविधियों को समझ सकते हैं। सरल शब्दों में, यह मशीन मरीज के दिमाग में चलने वाले ‘हाथ हिलाने के विचार’ को पकड़ती है और उसे सॉफ्टवेयर के जरिए एक रोबोटिक दस्ताने को भेजती है। यह दस्ताना मरीज के हाथ को खोलने और बंद करने में मदद करता है, जिससे मरीज चीजों को पकड़ पाता है।
चीन ने हाल के वर्षों में बीसीआई तकनीक को अपनी राष्ट्रीय रणनीतिक प्राथमिकता में शामिल किया है। साउथ चायना मॉर्निंग पोस्ट के अनुसार, चीन इसे भविष्य की आर्थिक वृद्धि के एक बड़े कारक के रूप में देख रहा है। पिछले साल, एक अन्य चीनी कंपनी ‘न्यूरोएक्सिस’ ने भी तब सुर्खियां बटोरी थीं, जब आठ साल से फालिज या लकवाग्रस्त एक इंसान ने इम्प्लांट के महज पांच दिन बाद अपने विचारों से डिजिटल उपकरणों को नियंत्रित करना शुरू कर दिया था। दूसरी ओर, एलन मस्क की कंपनी ‘न्यूरालिंक’भी इस दौड़ में तेजी से आगे बढ़ रही है। श्री मस्क ने सोशल मीडिया पर जानकारी दी है कि उनकी कंपनी 2026 में बीसीआई उपकरणों का बड़े पैमाने पर उत्पादन शुरू कर देगी। न्यूरालिंक के अनुसार, दुनिया भर में अब तक 12 गंभीर रूप से लकवाग्रस्त लोग उनके इम्प्लांट का उपयोग कर रहे हैं। हालांकि, कमर्शियल मंजूरी के मामले में चीन ने फिलहाल बाजी मार ली है।

