
ताइपे। ईरान-इजराइल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच एशिया के सामरिक मोर्चे पर एक नया और चौंकाने वाला संकेत सामने आया है। ताइवान के आसपास अक्सर सैन्य गतिविधियों से भरा रहने वाला चीन का मोर्चा अचानक शांत दिखाई देने लगा है, जिससे अंतरराष्ट्रीय रणनीतिक हलकों में नई चर्चाओं ने जन्म ले लिया है।
वैश्विक तनाव के माहौल के बीच चीन की सैन्य गतिविधियों में आए अप्रत्याशित बदलाव ने दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। जिस ताइवान क्षेत्र के आसपास चीन आमतौर पर युद्धपोत, लड़ाकू विमान, बमवर्षक और निगरानी जहाज तैनात रखता रहा है, वहां हाल के दिनों में उसकी मौजूदगी लगभग न के बराबर दिखाई दे रही है।
दरअसल, ताइवान को चीन अपना हिस्सा मानता है और इसी कारण बीते वर्षों में वह लगातार अपने फाइटर जेट और अन्य सैन्य संसाधनों के जरिए दबाव बनाए रखता रहा है। ताइपे से लेकर वॉशिंगटन तक इन उड़ानों को लेकर हमेशा सतर्कता बनी रहती थी। लेकिन पिछले लगभग दो सप्ताह में चीनी सैन्य विमानों की गतिविधि अचानक घट जाने से रक्षा विशेषज्ञों के बीच नई अटकलें लगने लगी हैं।
ताइवान के रक्षा मंत्रालय के अनुसार 27 फरवरी से 5 मार्च के बीच उसके एयर डिफेंस आइडेंटिफिकेशन ज़ोन में चीन का एक भी सैन्य विमान दर्ज नहीं हुआ। बाद में कुछ सीमित गतिविधि जरूर दिखी पिछले दो से तीन दिन में पांच से छह विमानों की उड़ान देखी गई। कुल मिलाकर दो सप्ताह में केवल सात उड़ानों का रिकॉर्ड सामने आया है, जो सामान्य स्थिति की तुलना में बेहद कम है।
पूर्व अमेरिकी रक्षा अधिकारी डू थॉम्पसन का कहना है कि चीन की गतिविधियों में इस तरह की अचानक कमी अनिश्चितता को बढ़ाती है। जब किसी बड़ी सैन्य शक्ति की रणनीति स्पष्ट नहीं होती, तो क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर जोखिम भी बढ़ जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति या तो अस्थायी रणनीतिक बदलाव का संकेत हो सकती है या फिर किसी बड़ी योजना से पहले की तैयारी।
