लेह/श्रीनगर | लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने और संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर ‘लेह एपेक्स बॉडी’ (LAB) ने 12 मार्च को शांतिपूर्ण विरोध मार्च का बड़ा आह्वान किया है। राजनीतिक और धार्मिक संगठनों के इस समूह का उद्देश्य केंद्र सरकार और गृह मंत्रालय की उच्च स्तरीय समिति पर बातचीत दोबारा शुरू करने के लिए दबाव बनाना है। लेह एपेक्स बॉडी के चेयरमैन चेरिंग दोरजे लकरुक ने स्पष्ट किया कि सरकार उनकी मांगों को लेकर गंभीर नहीं दिख रही है, इसलिए जनता को सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर होना पड़ा है। यह मार्च लेह चौक से शुरू होकर पोलोग्राउंड तक जाएगा।
इस विरोध प्रदर्शन का एक प्रमुख केंद्र बिंदु प्रख्यात जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की रिहाई है। वांगचुक पिछले साल सितंबर में हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद से राजस्थान की जोधपुर जेल में एनएसए (NSA) के तहत हिरासत में हैं। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि वांगचुक और अन्य दो कार्यकर्ताओं को तुरंत रिहा किया जाए और युवाओं पर दर्ज किए गए मुकदमे वापस लिए जाएं। पिछले साल हुई हिंसक झड़पों के बाद लद्दाख में स्थिति तनावपूर्ण रही है और प्रतिनिधिमंडल का कहना है कि जब तक उनकी जायज मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, वे पीछे नहीं हटेंगे।
प्रतिनिधिमंडल ने गृह मंत्रालय की हाई-पावर्ड कमेटी (HPC) द्वारा उनकी मांगों को ‘अनुपयुक्त’ बताए जाने पर कड़ी आपत्ति जताई है। चेरिंग दोरजे ने कहा कि सरकार ने हमसे 26 पन्नों का मसौदा मांगा और बाद में उसे खारिज कर दिया, जो लद्दाख की जनता के साथ विश्वासघात है। दूसरी ओर, पिछले साल की हिंसा की जांच कर रहे न्यायिक आयोग ने अपनी प्रगति रिपोर्ट में कहा है कि अब तक 18 प्रशासनिक गवाहों से पूछताछ की जा चुकी है और 45 सार्वजनिक हलफनामे मिले हैं। हालांकि, प्रदर्शनकारी आयोग की कार्यप्रणाली को धीमा बता रहे हैं और जल्द न्याय की मांग कर रहे हैं।

