नई दिल्ली | आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने पश्चिम एशिया में जारी भीषण संघर्ष को भारत की सुरक्षा और अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा खतरा बताया है। उन्होंने राज्यसभा महासचिव को नियम 267 के तहत नोटिस देकर सदन की कार्यवाही स्थगित करने और इस गंभीर विषय पर तत्काल चर्चा की मांग की है। संजय सिंह ने आगाह किया है कि इजरायल और ईरान के बीच बढ़ता तनाव केवल एक क्षेत्रीय युद्ध नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर भारत की ऊर्जा सुरक्षा और करोड़ों प्रवासियों के भविष्य पर पड़ेगा। उन्होंने सदन से अपील की कि इस राष्ट्रीय महत्व के मुद्दे पर राजनीति से ऊपर उठकर विचार किया जाए।
संजय सिंह ने नोटिस में रेखांकित किया है कि भारत अपनी जरूरत का 85 प्रतिशत कच्चा तेल इन्हीं क्षेत्रों से आयात करता है। ब्रेंट क्रूड के 90 डॉलर प्रति बैरल के पार जाने और घरेलू एलपीजी सिलेंडर के दामों में हुई 60 रुपये की हालिया बढ़ोतरी इस बात का प्रमाण है कि अंतरराष्ट्रीय अस्थिरता का बोझ आम आदमी की जेब पर पड़ने लगा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ जैसा महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्ग प्रभावित होता है, तो भारत में ईंधन की आपूर्ति बाधित हो सकती है, जिससे देश में महंगाई का एक नया दौर शुरू हो जाएगा।
सांसद ने खाड़ी देशों में कार्यरत लगभग एक करोड़ भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर भी गहरी चिंता जताई है। उन्होंने बताया कि भारत को मिलने वाले कुल विदेशी धन (रेमिटेंस) का एक बड़ा हिस्सा इन्हीं देशों से आता है, जो युद्ध की स्थिति में पूरी तरह रुक सकता है। इसके अलावा, भारत की महत्वाकांक्षी रणनीतिक परियोजनाएं जैसे ‘भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारा’ और चाबहार बंदरगाह के विकास पर भी अनिश्चितता के बादल मंडरा रहे हैं। संजय सिंह के अनुसार, सरकार को इन नागरिकों की सुरक्षित वापसी और सामरिक हितों की रक्षा के लिए तत्काल स्पष्ट रोडमैप तैयार करना चाहिए।

