
छतरपुर। होली सेलिब्रेशन की शुरुआत हो चुकी है। यहां हर साल की तरह इस बार भी होली का पर्व पूरे पांच दिनों तक मनाया जाएगा। गांव से लेकर शहर तक फाग गीतों की चौपालें सज गई हैं। बाजारों में रंग, गुलाल, पिचकारी और फूलों की दुकानों से रौनक बढ़ गई है, वहीं घरों में पारंपरिक बुंदेली पकवान तैयार किए जा रहे हैं। गांव-गांव में गोबर के बरूले बनाए गए हैं, जिन्हें होली पर जलाकर परंपरागत तरीके से उत्सव मनाया जाता है।
होलिका दहन के बाद उत्सव की शुरुआत होती है। पहले दिन कीचड़ से होली खेलने की परंपरा निभाई जाती है, इसके बाद रंग-गुलाल और फूलों से होली खेली जाती है। रंगपंचमी तक चौपालों में फाग गायन चलता रहता है। यह अनोखी परंपरा लोक संस्कृति और पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी देती है।
शहर के रामगली बजरिया और चौक बाजार में दुकानों पर रंगों के साथ फूलों की भी खूब बिक्री हो रही है। बुंदेली गुजिया, बेसन पपड़ी, सलोनी, मठरी और दही बड़े की मांग बढ़ गई है। व्यापारियों का कहना है कि होली को लेकर बाजार में अच्छी चहल-पहल है और बिक्री भी संतोषजनक चल रही है।
