जबलपुर: खजरी खिरिया निवासी रामराज पटेल और उनकी पत्नी वंदना पटेल को लगभग 5 महीने के बाद भी आज तक अपने जुड़वा नवजात बच्चों की मौत के मामले में न्याय नहीं मिल सका है। जिसको लेकर परिजनों ने जांच रिपोर्ट पर भी आपत्ति जताते हुए निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्यवाही की मांग की है। जानकारी के अनुसार जिला चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. संजय मिश्रा द्वारा प्रस्तुत जांच रिपोर्ट में इंदिरा आईवीएफ में ही ब्लड ग्रुप संबंधी जटिलता का उल्लेख किया गया है। जांच में कहना है कि इंदिरा आईवीएफ सेंटर ने परिजनों को आश्वासन देते हुए आगे का टेस्ट निशुल्क कराने की बात कही है। वहीं परिजन रामराज पटेल का कहना है कि उन्हें किसी प्रकार का आश्वासन नहीं मिला है, फिर से जांच होनी चाहिए और दोषियों पर ठोस कार्रवाई की जाए।
13 साल बाद घर आई थी खुशियां, मातम में बदलीं
रामराज पटेल ने बताया कि उनकी शादी के 13 वर्ष बाद 17 सितंबर 2025 को मातृम ऑर्थो एण्ड गायनिक सेन्टर में उनकी पत्नी ने सुबह 11:04 और 11:05 बजे दो पुत्रों को जन्म दिया। जन्म के समय दोनों बच्चे स्वस्थ बताए गए। परिवार में लंबे इंतजार के बाद संतान सुख मिलने से खुशी का माहौल था। परिजनों के अनुसार जन्म के कुछ घंटों बाद ही बच्चों में पीलिया के लक्षण दिखाई देने लगे। इसकी जानकारी अस्पताल स्टाफ और संबंधित डॉक्टर को दी गई, लेकिन गंभीरता से ध्यान नहीं दिया गया। अगले दिन जांच में एक बच्चे का पीलिया स्तर 19 और दूसरे का 20 बताया गया। इसके बाद बच्चों को अन्य अस्पताल में भर्ती कराया गया।
एक की जबलपुर, दूसरे की नागपुर में मौत
परिवार ने दोनों नवजातों को गैलेक्सी अस्पताल में भर्ती कराया, जहां देर रात एक बच्चे की मौत हो गई। दूसरे बच्चे को नागपुर रेफर किया गया, लेकिन वहां भी इलाज के दौरान उसकी मृत्यु हो गई। परिजनों का आरोप है कि समय पर उचित उपचार मिलता तो दोनों बच्चों की जान बचाई जा सकती थी।
सदमे से नहीं उभर पाया पूरा परिवार
इस घटना के बाद से पूरा परिवार गहरे सदमे से नहीं उभर पाया है। वंदना पटेल की मानसिक स्थिति भी प्रभावित बताई जा रही है। परिजनों ने संबंधित चिकित्सकों और अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए प्रशासन से निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध सख्त कानूनी व प्रशासनिक कार्रवाई की मांग की है। परिवार का कहना है कि उन्हें आज तक न्याय नहीं मिला है और वे न्याय की प्रतीक्षा में हैं।
