जबलपुर: मप्र हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा व जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ ने पालिटेक्निक व्याख्याता भर्ती नियम को चुनौती देने मामले को गंभीरता से लिया। युगलपीठ ने मामले में राज्य शासन व अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद, एआइसीटीई सहित अन्य को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।दरअसल याचिकाकर्ता पालिटेक्निक कालेजों में कार्यरत अतिथि व्याख्याताओं की ओर से अधिवक्ता विनायक प्रसाद शाह व पुष्पेंद्र कुमार शाह ने पक्ष रखा।
उन्होंने दलील दी कि याचिकाकर्ताओं ने न केवल गेट-2026 के माध्यम से भर्ती प्रक्रिया को, बल्कि मध्य प्रदेश तकनीकी शिक्षा पालिटेक्निक कालेज, शिक्षण कैडर सेवा भर्ती नियम-200 की संवैधानिक वैधता को भी चुनौती दी है। ऐसा इसलिए क्योंकि यह नियम मध्य प्रदेश सोसाइटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम-1973 की धारा 43(1) के तहत बनाए गए हैं, जिसका उद्देश्य केवल सोसायटियों के पंजीकरण से संबंधित है, न कि राज्य में व्याख्याताओं की भर्ती व सेवा शर्तें तय करने से है। इसी आधार पर इन नियमों को अपने मूल अधिनियम के दायरे से बाहर, मनमाना व संविधान के अनुच्छेद 14,16 व 21 का उल्लंघन बताया गया है।
नियमों में 2015 के संशोधन द्वारा लिखित परीक्षकों अनिवार्य किया गया, जिसके आधार पर अब गेड-2026 को भर्ती का मानदंड बनाया जा रहा है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि गेट मूलत: स्नातकोत्तर प्रवेश व फेलोशिप के लिए है, न कि शिक्षक भर्ती के लिए। एआइसीटीई ने भी शिक्षक पद के लिए गेट को अनिवार्य नहीं किया है। इन्हीं नियमों के आधार पर 2019 में जारी भर्ती विज्ञापन को ग्वालियर बेंच में चुनौती दी गई थी, जहां अंतरिम रोक लगाई गई थी।
वह मामला अभी भी लंबित है। पटना उच्च न्यायालय ने राम मनोहर पांडे बनाम बिहार राज्य (2019) में गेट की अनिवार्यता को असंवैधानिक ठहराया थाए जिसे सुप्रीम कोर्ट ने भी बरकरार रखा। इसी आधार पर याचिका में मांग की गई है कि 21 सितंबर 2025 के गेट आधारित भर्ती विज्ञापन को निरस्त किया जाए। 2004 के भर्ती नियमों व उनके संशोधनों को अवैध घोषित किया जाए और संविधान के अनुच्छेद 309 के तहत उचित नियम बनाए जाने तक भर्ती प्रक्रिया पर रोक लगाई जाए।
