नई दिल्ली | 13 जनवरी, 2026: ईरान में भड़की सरकार विरोधी चिंगारी के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तेहरान की सत्ता को हिलाने के लिए एक बेहद खतरनाक और गोपनीय रणनीति को हरी झंडी देने के संकेत दिए हैं। वरिष्ठ अधिकारियों ने ट्रंप को सैन्य विकल्पों के साथ-साथ ऐसे खुफिया ऑपरेशन्स की जानकारी दी है, जो पारंपरिक युद्ध से कहीं अधिक घातक हो सकते हैं। अमेरिकी रक्षा विभाग के सूत्रों के अनुसार, इस बार अमेरिका केवल हवाई हमलों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि ईरान की कमांड संरचना, संचार नेटवर्क और सरकारी मीडिया को पूरी तरह ठप करने के लिए बड़े पैमाने पर साइबर हमले और मनोवैज्ञानिक युद्ध (Psychological Warfare) छेड़ने की तैयारी में है।
ईरान की बिगड़ती स्थिति पर चर्चा के लिए मंगलवार को व्हाइट हाउस में ट्रंप की राष्ट्रीय सुरक्षा टीम की एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाई गई है। इस बैठक में ईरान नीति की समीक्षा और सैन्य हस्तक्षेप की समय-सीमा तय की जा सकती है। हालांकि कूटनीतिक रास्ते अभी भी खुले रखे गए हैं, लेकिन सूत्रों का कहना है कि अगर ईरान ने अपनी डिजिटल प्रणालियों और रक्षा नेटवर्क में बदलाव नहीं किया, तो अमेरिका ‘वेनेजुएला मॉडल’ से भी सख्त कार्रवाई कर सकता है। राष्ट्रपति ट्रंप ने पहले ही चेतावनी दी है कि ईरानी सुरक्षा बल अमेरिकी प्रशासन द्वारा तय की गई “रेड लाइन” को पार कर चुके हैं।
ईरान के सभी 31 प्रांतों में जारी विरोध प्रदर्शनों ने अब हिंसक रूप ले लिया है। ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज एजेंसी (HRANA) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, अब तक 600 से अधिक प्रदर्शनकारियों की मौत हो चुकी है, जिनमें से अधिकतर की जान सुरक्षा बलों की सीधी गोलीबारी में गई है। तेहरान समेत कई बड़े शहरों में इंटरनेट पूरी तरह बंद कर दिया गया है ताकि दुनिया को वहां की असलियत का पता न चल सके। ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि निर्दोष लोगों का कत्लेआम नहीं रुका, तो अमेरिकी हस्तक्षेप निश्चित है, जिससे क्षेत्र में महायुद्ध का खतरा मंडराने लगा है।

