इंडिया ग्रोथ स्टोरी पर मंदी का साया और IPO मार्केट में मची खुली लूट, SEBI की चुप्पी के बीच बर्बाद हो रहे रिटेल निवेशक, पूंजीपतियों की जेब में जा रहे करोड़ों रुपये

नई दिल्ली। 22 दिसंबर, 2025: भारतीय शेयर बाजार वर्तमान में एक विचित्र और चिंताजनक दौर से गुजर रहा है। एक तरफ जहां सेंसेक्स और निफ्टी अपने सर्वोच्च स्तरों के करीब हैं, वहीं दूसरी ओर बाजार का व्यापक रुख दिखाने वाला ‘बीएसई स्मॉलकैप’ इस साल अब तक 13% से अधिक टूट चुका है। विशेषज्ञों का मानना है कि अर्थव्यवस्था के तमाम बुनियादी संकेतक जैसे 8% की जीडीपी ग्रोथ, नियंत्रित महंगाई और स्थिर सरकार के बावजूद 80% से अधिक कंपनियों के शेयर मंदी की चपेट में हैं। यह स्थिति तब और गंभीर हो जाती है जब रुपया लगातार गिर रहा है। आरोप है कि कुछ बड़े ऑपरेटर और फंड हाउस चुनिंदा भारी भरकम शेयरों के दम पर इंडेक्स को ऊपर टिकाए हुए हैं, ताकि आम निवेशकों को भ्रम में रखकर महंगे आईपीओ के जाल में फंसाया जा सके।

शेयर बाजार में पिछले पांच वर्षों के दौरान आईपीओ के जरिए रिकॉर्ड 5.41 ट्रिलियन रुपये जुटाए गए हैं, लेकिन इसमें एक बड़ा हिस्सा ‘ऑफर फॉर सेल’ (OFS) का है। चिंता की बात यह है कि जुटाए गए धन का लगभग 63% हिस्सा सीधे प्रमोटरों और विदेशी निवेशकों की जेब में चला गया है, न कि कंपनी के विस्तार में। लालची मर्चेंट बैंकर्स और प्रमोटर्स की मिलीभगत से पेटीएम, ओला और होनासा जैसी कई घाटे वाली कंपनियों के आईपीओ हजारों रुपये के प्रीमियम पर लाए गए, जिनके भाव अब धूल चाट रहे हैं। सेबी (SEBI) और सरकार इस खुली लूट पर केवल चिंता व्यक्त कर रहे हैं, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई न होने से करोड़ों छोटे निवेशकों की जमा पूंजी डूब रही है।

देश के मध्यम वर्ग द्वारा एसआईपी (SIP) के जरिए म्यूचुअल फंड में जो पैसा लगाया जा रहा है, उसका एक बड़ा हिस्सा फंड मैनेजर्स द्वारा इन्ही अत्यधिक महंगे और जोखिम भरे आईपीओ में झोंका जा रहा है। इसी कारण म्यूचुअल फंड्स के रिटर्न में लगातार गिरावट देखी जा रही है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी निजी निवेश में कमी पर चिंता जताई है, क्योंकि आईपीओ का पैसा देश की ग्रोथ स्टोरी में लगने के बजाय विदेशी मुद्रा के रूप में बाहर जा रहा है, जिससे रुपया कमजोर हो रहा है। यदि समय रहते इन अनियंत्रित सार्वजनिक निर्गमों पर लगाम नहीं लगाई गई, तो 1992-95 जैसी भीषण मंदी का खतरा दोबारा पैदा हो सकता है, जो पूरी अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ देगा।

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