नयी दिल्ली 16 दिसम्बर (वार्ता) रक्षा मंत्रालय ने मीडिया में आई इन रिपोर्टों का खंडन किया है कि हाल ही में रूस गये एक सरकारी प्रतिनिधिमंडल में शामिल निजी उद्योगपतियों ने अपने रूसी समकक्षों के साथ एक बैठक की थी। मंत्रालय ने मंगलवार को एक वक्तव्य जारी कर इन रिपोर्टों को आधारहीन और तथ्यात्मक रूप से गलत बताते हुए कहा कि यह प्रतिनिधिमंडल भारत-रूस अंतर-सरकारी आयोग सैन्य और सैन्य तकनीकी सहयोग बैठक में भाग लेने के लिए गत 25 से 29 अक्टूबर तक मॉस्को में था। बैठक की सह-अध्यक्षता रक्षा सचिव (उत्पादन) संजीव कुमार और रूस के सैन्य तकनीकी सहयोग के लिए संघीय सेवा के पहले उप निदेशक एंड्री ए बॉयत्सोव ने की।
बयान में कहा गया है, “भारतीय प्रतिनिधिमंडल में रक्षा मंत्रालय (रक्षा उत्पादन विभाग, रक्षा विभाग और तीनों सेनाएं) और रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (आर्मर्ड व्हीकल्स निगम लिमिटेड, भारत डायनामिक्स लिमिटेड, हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड, इंडिया ऑप्टेल लिमिटेड, एडवांस्ड वेपन्स एंड इक्विपमेंट इंडिया लिमिटेड, गोवा शिपयार्ड लिमिटेड, मुनिशंस इंडिया लिमिटेड, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड) के अधिकारी शामिल थे। प्रतिनिधिमंडल में कोई भी निजी उद्योगपति शामिल नहीं था।
मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि रक्षा मंत्रालय ने इस रिपोर्ट पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। वक्तव्य में कहा गया है कि इस संबंध में स्पष्ट रूप से सूचित किया जाता है कि मंत्रालय से इतने कम समय में संवेदनशील और रणनीतिक मुद्दों पर टिप्पणी करने की उम्मीद नहीं की जा सकती है, क्योंकि रिपोर्टर ने टिप्पणी के लिए उस समय संपर्क किया जब रिपोर्ट प्रकाशित होने वाली थी। मीडिया भविष्य में किसी भी गलत रिपोर्टिंग को रोकने के लिए अपनी रिपोर्ट को प्रकाशित करने से पहले कठोर तथ्य-जांच प्रोटोकॉल लागू कर सकता है।
भारत-रूस अंतर-सरकारी आयोग सैन्य और सैन्य तकनीकी सहयोग पर तीनों सेनाओं के संबंध में पारंपरिक सैन्य-से-सैन्य सहयोग से विशेष रूप से निपटने के लिए एक तंत्र और सहयोग का एक संरचित ढांचा बनाने के लिए हस्ताक्षर किए गए थे। सैन्य तकनीकी सहयोग और रक्षा उद्योग पर कार्य समूह की सह-अध्यक्षता रक्षा उत्पादन सचिव करते हैं और इसका आयोजन हर वर्ष बारी-बारी से भारत और रूस में किया जाता है। कार्य समूह की 22वीं बैठक पिछले वर्ष नवंबर में भारत में हुई थी।
