
इंदौर. रेलवे यात्रियों की सुरक्षा और जनसेवा में जीआरपी इंदौर ने एक बार फिर अपनी संवेदनशीलता और समर्पण का परिचय दिया है. पिछले पांच वर्षों में जीआरपी ने 1217 असंरक्षित बालक-बालिकाओं को रेलवे स्टेशनों, ट्रेनों और परिसरों से रेस्क्यू कर उनके परिवारों तक सुरक्षित पहुंचाया.
रेल एसपी पद्मविलोचन शुक्ला ने नव भारत को बताया कि केवल जनवरी से अक्टूबर 2025 तक ही 140 असंरक्षित बच्चे 68 बालक और 72 बालिकाएं सुरक्षित परिजनों तक लौटाए गए. इनमें से 36 बच्चों के संबंध में अपहरण जैसे गंभीर अपराध दर्ज थे. सभी बच्चों को जीआरपी की तकनीकी दक्षता, तत्परता और मानवीय प्रयासों से सुरक्षित ढूँढा गया. एसपी शुक्ला ने बताया कि जीआरपी की टीम लगातार रेलवे प्लेटफॉर्म, ट्रेनों और स्टेशन परिसरों में सर्च अभियान चलाती है. पुलिसकर्मी न केवल यात्रियों से संवाद स्थापित करते हैं, बल्कि अकेले या असहाय बच्चों व महिलाओं की सुरक्षा के लिए सक्रिय निगरानी रखते हैं. बच्चों के भटकने के कारण अलग-अलग हैं. कुछ घर से बिछड़ जाते हैं, तो कुछ नाराज़ होकर बाहर निकल जाते हैं. पिछले पांच वर्षों में वर्षवार रेस्क्यू का आंकड़ा इस प्रकार है, 2020 में 112, 2021 में 188, 2022 में 396, 2023 में 231, 2024 में 148 और 2025 जनवरी से अक्टूबर में 142 बच्चे. एसपी शुक्ला का कहना है कि जीआरपी की यह पहल न केवल बच्चों की सुरक्षा का संदेश देती है, बल्कि यह भी स्पष्ट करती है कि पुलिस समाज के हर वर्ग की सुरक्षा और कल्याण के लिए हमेशा तत्पर है. मानवता, संवेदनशीलता और सतर्कता का यह उदाहरण निश्चित रूप से जीआरपी इंदौर की उत्कृष्ट कार्यशैली और जनहित में उसकी निष्ठा को उजागर करता है.
