सड़कों तक पहुंची कांग्रेस की गुटबाजी की लड़ाई

महाकौशल की डायरी
अविनाश दीक्षित

नियुक्तियों के लिए राजनैतिक कार्यकर्ता हर पैंतरा आजमाते हैं, अमूमन यह आपसी खींचतान तक ही सीमित दिखाई पड़ती है, किन्तु इस विषय से संबंधित मसला जब सड़क पर संघर्ष का रूप अख्तियार कर ले, तो यह किसी भी संगठन के लिए चिंताजनक हो जाता है। कुछ ऐसा ही हाल अनूपपुर जिले की कांग्रेस का है, जहां नियुक्तियों को लेकर मचा अंदरूनी घमासान हाथापाई और चाकूबाजी तक पहुंच गया। क्षेत्र में चल रही चर्चाओं के अनुसार हाल ही हुए विवाद की वजह लम्बे अर्से से चल रही गुटीय वर्चस्व की लड़ाई है।

बताया जा रहा है कि कोतमा विधायक सुनील सराफ तथा जिला कांग्रेस उपाध्यक्ष एवं पुष्पराजगढ़ विधायक फुन्देलाल सिंह मार्को समर्थकों के बीच काफी समय से अघोषित अनबन चल रही थी, जिले में कुछ समय पूर्व हुई सांगठनिक नियुक्तियों में कोतमा विधायक के समर्थकों को तवज्जो मिल गई। चर्चाओं के अनुसार नियुक्ति के पूर्व जिला संगठन को दरकिनार रखा गया जिससे पुष्पराजगढ़ विधायक समर्थकों की नाराजगी और भी बढ़ गई। इस बात की शिकायत कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ तक पहुंची, जिस पर सफाई देने सुनील सराफ को भोपाल तलब किया गया। इस बीच दूसरे गुट के नेता भी भोपाल पहुंच गये। कमलनाथ ने दोनों पक्षों को क्या समझाइश दी, यह तो उजागर नहीं हो पाया, लेकिन पीसीसी से निकलने के बाद हालात एकदम से बिगड़ गये। परस्पर आरोप-प्रत्यारोप के साथ हाथापाई के बाद दोनों पक्षों ने पुलिस में एक-दूसरे के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है। गुटबाजी के अंतरनिहित कारण कुछ और भी हो सकते हैं, किन्तु सड़क पर कांग्रेसियों का आपराधिक संघर्ष जहां कांग्रेस के लिए चिंता के हालात पैदा कर गया है, वहीं विरोधियों को तंज कसने के भरपूर अवसर भी दे गया। इस मामले में पीसीसी क्या कदम उठायेगी, इस पर सभी की नजर लगी है।

जगह-जगह अंबार, नगर निगम को ढूंढे नहीं मिल रहा कूड़ा…
अधिकतर नगरीय निकायों में कमाल के काम होते हैं, विभिन्न समस्याओं के समाधान के लिए सहज सुलभ जरिये गिनाए जाते हैं, लोग ढेरों शिकायत भी करते हैं, लेकिन इक्का-दुक्का को छोड़कर अन्य शिकायतों का हाल वही होता है, जो आमतौर पर समझा जाता है, अर्थात हाल-बेहाल। जबलपुर नगर निगम में भी इन दिनों आश्चर्यजनक कामकाज हो रहा है। मसला कूड़ा-करकट से जुड़ा है, जो शहर के अधिकांश इलाकों में बिखरा पड़ा रहता है, बावजूद इसके कचरा से बिजली बनाने के संयंत्र का पेट भर नहीं पा रहा है। शहर से लगे कठौंदा में 178 करोड़ की लागत से स्थापित संयंत्र में 600 टन कचरे की जरूरत प्रतिदिन होती है, किन्तु प्लांट को महज आधा यानि 300 टन कचरा ही मिल पा रहा है।

एस्सल ग्रुप और नगर निगम के मध्य वर्षों पूर्व हुए अनुबंध के समय नगर निगम की ओर से दावा किया गया कि 600 से 650 टन कचरा वह उपलब्ध कराएगा, प्रारंभ में शहर में जगह-जगह लगे कूड़े-करकट के अंबार से यह लगा था कि 600 टन कचरा सहजता से एकत्रित कर लिया जाएगा, परन्तु कचरे को लेकर चल रहे खेल के चलते प्रतिदिन का लक्ष्य आज तक पूरा नहीं हो पाया है, अब इसे जुटाने के लिए भोपाल, यूपी, गुजरात सहित अन्य जिलों का सहारा लेना पड़ रहा है, यहां से आये कचरे से प्लांट को कचरा आपूर्ति की जा रही है। यह बात अलहदा है कि जबलपुर की गलियों से लेकर मुख्य मार्गों में जगह-जगह कूड़ा-करकट के अंबार लगे हैं, गंदगी के ढेर को लेकर आए-दिन समाचार प्रकाशित हो रहे हैं, विभिन्न संगठन विज्ञप्तियों के जरिये समस्या समाधान की आवाज लगा रहे हैं, किंतु नगर निगम अमले को कचरा ढूंढे नहीं मिल रहा है?

नव भारत न्यूज

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