नयी दिल्ली 19 सितंबर (वार्ता) जापान की क्रेडिट रेटिंग एजेंसी रेटिंग एंड इन्वेस्टमेंट इंफॉर्मेशन, इंक. (आर एंड आई) ने कहा है कि भारत के निर्यात पर अमेरिका में ऊंचे शुल्क का प्रभाव सीमित रहेगा क्योंकि भारतीय उत्पादकों की अमेरिकी बाजार पर निर्भरता कम है।
एजेंसी का यह भी मानना है कि वस्तु एवं सेवा कर में किये गए हाल के सुधार से राजस्व में कुछ कमी आयेगी पर उपभोग बढ़ने से इसका प्रभाव सीमित होगा।
आर एंड आई ने शुक्रवार को भारत की वित्तीय साख को उन्नत करते हुए अपनी रिपोर्ट में अमेरिका द्वारा हाल ही में भारत के सामानों पर अपने यहां आयात पर शुल्क में की गई वृद्धि को एक जोखिम के कारक के रूप में स्वीकार किया। हालाँकि उसने टिप्पणी की है कि निर्यात के लिए भारत की अमेरिका के बाजार पर सीमित निर्भरता और घरेलू मांग-संचालित विकास मॉडल से अमेरिका में ऊंचे शुल्क के प्रभाव सीमित होंगे।
इसके अलावा, आरएंडआई ने यह भी कहा कि जीएसटी को युक्तिसंगत बनाने से राजस्व में कमी आएगी, लेकिन निजी उपभोग को बढ़ावा देकर इस नकारात्मक प्रभाव की कुछ हद तक भरपाई की जा सकेगी।
एजेंसी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रशासन की नीतियों की भी प्रशंसा की है और कहा है कि उनका मुख्य उद्देश्य विदेशी निर्माताओं को भारत की ओर आकर्षित करना, बुनियादी ढाँचे का विकास करना, कारोबारी माहौल में सुधार के लिए कानूनी ढाँचे को संस्थागत बनाना, ऊर्जा आयात पर निर्भरता कम करना और आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
आर एडं आई ने भारत की रेटिंग बढ़ा कर बीबीबी प्लस (स्थिर) में रख दी है। मई के बाद यह तीसरा अवसर है जब किसी विदेशी एजेंसी ने भारत की विदेशी कर्ज के लिए वित्तीय खास का स्तर ऊंचा किया है। इससे कर्ज के लिए जोखिम में कमी माना जाता है और इस तरह भारतीय इकाइयों के लिए विदेशों से कर्ज बेहतर दर पर जुटाने में मदद मिलती है।
