जबलपुर: एक रेलकर्मी ने केन्द्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) में याचिका दायर कर कोरोना काल में उसके अनुपस्थित रहने की गलत व्याख्या करने को चुनौती दी गई है। कैट के न्यायिक सदस्य जस्टिस एके श्रीवास्तव एवं सदस्य मल्लिका आर्य की युगलपीठ ने पश्चिम मध्य रेल के महाप्रबंधक एवं डीआरएम जबलपुर को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
याचिकाकर्ता सतीश कुमार कटनी में डिप्टी टिकट इंस्पेक्टर के पद पर कार्यरत है। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अजय रायजादा, अंजना श्रीवास्तव एवं अभिमन्यु सिंह ने बताया कि लीव अकाउंट में उसे 71 दिन अनुपस्थित बताया गया, जोकि गलत है। याचिकाकर्ता ने 21 मार्च से 24 मार्च 2020 तक मुख्यालय से बाहर रहने के लिए आकस्मिक अवकाश मांगा था। 25 तारीख को उसका रेस्ट था। इस दौरान वह अपने गृह जिले बिहार में था। सरकार ने लॉकडाउन घोषित कर दिया।
लॉकडाउन से लौटने के बाद 4 जून 2020 को याचिकाकर्ता ने ड्यूटी ज्वाइन करने गया तो उसे एक सप्ताह के लिए क्वॉरेंटाइन कर दिया गया। इसके बाद 11 जून को उसे फिटनेस मिलने पर 12 जून को ड्यूटी ज्वाइन की। सरकार ने एक आदेश जारी किया था जो कर्मचारी विभाग से अनुमति लेकर गए थे, उन्हें लॉकडाउन की अवधि में सेवा में माना जाएगा। इसके बावजूद रेलवे ने गलत व्याख्या करते हुए याचिकाकर्ता को इतनी लंबी अवधि के लिए अनुपस्थित बता दिया।
