
ब्यावरा।राजगढ़ और गुना जिलाध्यक्ष की कमान दो युवा पूर्व मंत्री को सौंपी है. राजगढ़ जिलाध्यक्ष पद पर पूर्व केबिनेट मंत्री प्रियवृत सिंह एवं गुना जिलाध्यक्ष की कमान जयवर्धन सिंह को सौंपी गई है.
दोनों ही युवाओं को जिलाध्यक्ष बनाए जाने से पार्टी में खासा उत्साह है, विशेषकर युवा कार्यकर्ताओं में काफी हर्ष देखा जा रहा है.गुटबाजी और जातिवाद से परे हटकर लिए फैसले का हो रहा स्वाग
कांग्रेस की राजनीति में जिला इंकाध्यक्ष के पद के लिए हुआ चयन अनेक अर्थो में पार्टी क़ो मजबूत करने का आधार बनता नजर आ रहा है.पहली बार गुना और राजगढ़ जिले के कांग्रेस कार्यकर्ताओ में ख़ुशी का वातावरण देखने क़ो मिल रहा है.
यह सर्व विदित है कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने जिला इंकाध्यक्ष के निर्णय में अपनी प्रभावी भूमिका निभाई है. उन्होंने पर्यवेक्षक के माध्यम से दोनों जिलों के करीब डेढ़ लाख कार्यकर्त्ता के विचार जानकार उनकी पसंद क़ो महत्व दिया है.
राहुल गांधी ने भोपाल में यह स्पष्ट किया था कि वें संघठन क़ो मजबूत बनाना चाहते है.
उन्होंने इसके लिए वर्तमान में संघठन की नींव मजबूत कर उस पर भविष्य में सत्ता का महल बनाने की कल्पना की है. पहली बार राजगढ़ और गुना जिले में कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए कार्यकर्त्ता की आवाज क़ो महत्व दिया गया है. कांग्रेस ने जातिवाद से हटकर निर्णय लेकर आम कार्यकर्त्ता क़ो संघठन से दिल पूर्वक जुड़ने का अवसर दिया है. राजगढ़ और गुना जिले में कांग्रेस क़ो ऐसे नेतृत्व की भी जरूरत थी जो सशक्त, निडर व विचारधारा के साथ मजबूती के साथ जुडा हुआ हो. दो दशकों से प्रदेश में सत्ता से बाहर रहने वाली कांग्रेस के लिए करो या मरो के सिवाय कुछ नहीं बचा है.
इसलिए कांग्रेस ने ऐसे मजबूत नेताओं क़ो संघठन की कमान सोपी है जो न तो कभी विचार धारा से समझौता करेंगे और न ही एकला चलो की नीति पर चलेंगे.
कहने क़ो यह माना जा सकता है कि कांग्रेस ने प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह क़ो तरजीह दी है. क्योंकि गुना जिले की कमान उनके सुपुत्र जयवर्द्धन सिंह क़ो दी गई है जबकि राजगढ़ जिले की कमान उन्हीं के परिवार के सदस्य प्रियवृत सिंह क़ो सोपी है. लेकिन हकीकत बड़ी रोचक और चौकाने वाली है.
राजगढ़ हो या गुना दोनों जिले के निर्णय में कांग्रेस नेतृत्व से दिग्विजय सिंह ने न तो अपनी कोई राय दी है और न ही सहमति अथवा असहमति जताई है.
गुना जिले में ज्योतिरादित्व सिंधिया और राजगढ़ में भाजपा संघठन क़ो चुनौती देने के लिए कांग्रेस ने दोनों युवा तुर्क नेताओं क़ो वर्तमान हालातों में उपयुक्त माना है ऐसा लगता है. यह सभी जानते है कि प्रियवृत सिंह और जयवर्द्धन सिंह जहाँ जुझारू और अनुभवी नेता के साथ ही अपनी वाकपटुता तथा शासन प्रशासन के साथ संघर्ष करने के लिए है जाने जाते है वहीं दोनों का पारिवारिक रिश्ते कांग्रेस से निलंबित हुए पूर्व सांसद लक्षमण से है. इनके बहाने कांग्रेस ने लक्समण सिंह की भी हवा निकाल दी है जो कांग्रेस क़ो चुनौती देने के बयान दे रहे थे. कुल मिलाकर यह निर्णय कांग्रेस के लिए काफ़ी फायदेमंद और कार्यकर्त्ता के लिए उत्साह का संचार करने वाला माना जा रहा है.
आमजन में है दोनों नेताओं की पेठ
पूर्व मंत्री प्रियवृत सिंह एवं जयवर्धन सिंह ऐसे युवा नेता है जिनकी पार्टी के भीतर तो अपनी एक अलग ही छाप है वहीं दोनों अपनी सहज, सरल एवं मिलनसार प्रवृत्ति के चलते आमजन में भी काफी लोकप्रिय है.
नवनियुक्त जिलाध्यक्षों की सतत् रुप से सक्रियता रही है. समय-समय पर पार्टी के आयोजन या फिर अन्य अवसरों पर इनके द्वारा भ्रमण कर कार्यकर्ताओं से मिलना-जुलना, उनकी बात सुनने तथा पार्टी में समन्वय स्थापित करने में दोनों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है.
कार्यकर्ताओ के अनुसार पार्टी को आज ऐसे सक्रिय एवं सभी को साथ में लेकर चलने वाले युवा नेतृत्व की जरुरत थी.. यही कारण है कि पार्टी ने दोनों ही युवा नेताओं को जिलाध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण पद की कमान सौंपी. दोनों ही जिलाध्यक्षों को पार्टी के पदाधिकारी, कार्यकर्ताओं, जनप्रतिनिधियों ने बधाई दी है.
