नई दिल्ली, 31 जुलाई (वार्ता) उच्चतम न्यायालय ने अपने उस फैसले को गुरुवार को वापस ले लिया, जिसमें मेसर्स भूषण पावर एंड स्टील लिमिटेड (बीपीएसएल) के लिए जेएसडब्ल्यू स्टील की समाधान योजना को खारिज कर दिया गया था और कर्ज में डूबी इस कंपनी के परिसमापन का आदेश दिया गया था।
मुख्य न्यायाधीश बी आर गवई और न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने न्यायमूर्ति बेला एम त्रिवेदी (अब सेवानिवृत्त) द्वारा दो मई को दिए गए फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिकाओं को स्वीकार करने के बाद इन मुद्दों पर नए सिरे से विचार करने का फैसला किया।
पीठ ने कहा, “प्रथम दृष्टया हमारा मानना है कि विवादित फैसला विभिन्न फैसलों द्वारा निर्धारित कानूनी स्थिति पर सही ढंग से विचार नहीं करता है।”
न्यायमूर्ति त्रिवेदी (अब सेवानिवृत्त) और न्यायमूर्ति शर्मा की पीठ ने 2 मई, 2025 को जेएसडब्ल्यू स्टील की 19,300 करोड़ रुपये की समाधान योजना को रद्द कर दिया था।
शीर्ष अदालत ने जेएसडब्ल्यू स्टील और बीपीएसएल के ऋणदाताओं, पंजाब नेशनल बैंक, भारतीय स्टेट बैंक और अन्य द्वारा दायर पुनर्विचार याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया।
पीठ ने पाया कि यह एक उपयुक्त मामला है जिसमें पुनर्विचाराधीन फैसले को वापस लेने और मामले पर नए सिरे से विचार करने की आवश्यकता है। पीठ ने कहा, “हम पुनर्विचार की अनुमति देते हुए दोनों पक्षों के लिए उपलब्ध सभी प्रश्नों को सुनवाई के दौरान बहस का विकल्प खुला रखते हैं।”
शीर्ष अदालत ने यह भी कहा कि जेएसडब्ल्यू स्टील द्वारा किए गए लगभग 20,000 करोड़ रुपये के निवेश और लगभग 25,000 कर्मचारियों की आजीविका को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। पीठ ने यह कहा, “संविधान के अनुच्छेद 142 का उपयोग अन्याय करने के लिए नहीं, बल्कि पूर्ण न्याय करने के लिए किया जाना चाहिए। 25,000 लोगों की जीविका नहीं छीनी जा सकती।”
जेएसडब्ल्यू स्टील की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता नीरज किशन कौल और लेनदारों की समिति की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलीलें दीं। याचिकाकर्ताओं ने उस फैसले की समीक्षा की मांग की थी, जिसमें पाया गया था कि बीपीएसएल की 19,300 करोड़ रुपये की समाधान योजना दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता, 2016 के प्रावधानों के अनुरूप नहीं थी।
शीर्ष अदालत ने राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण के समक्ष लंबित परिसमापन कार्यवाही पर 26 मई, 2025 को यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया था, क्योंकि उस समय पीड़ित पक्ष द्वारा समीक्षा याचिका दायर करने का समय समाप्त नहीं हुआ था।
शीर्ष अदालत ने 2 मई, 2025 के अपने फैसले में संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत प्रदत्त अधिकार क्षेत्र का प्रयोग किया। अदालत ने राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण को कॉर्पोरेट देनदार-बीपीएसएल के विरुद्ध आईबीसी के अध्याय-3 के तहत और कानून के अनुसार परिसमापन कार्यवाही शुरू करने का निर्देश दिया।
पीठ ने माना था कि जेएसडब्ल्यू स्टील ने एनसीएलएटी द्वारा अनुमोदन के बाद लगभग दो वर्षों तक समाधान योजना को लागू नहीं किया, हालाँकि इसे लागू करने में कोई कानूनी बाधा नहीं थी। पीठ ने कहा, “समाधान योजना की शर्तों का इस तरह का घोर उल्लंघन संहिता के मूल उद्देश्य और प्रयोजन को ही विफल कर देता है।”
