उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ का इस्तीफा

बिना किसी से विचार विमर्श किए एकाएक जगदीप धनखड़ का उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा देना सोमवार रात से राजनीतिक सनसनी बना हुआ है. इसका उत्तर किसी के पास नहीं है कि यदि उनका स्वास्थ्य खराब था, तो उन्होंने राज्यसभा का संचालन लगभग 8 घंटे करने के बाद अचानक रात को 9:20 पर इस्तीफा क्यों दिया ? यह सही है कि उन्हें हार्ट प्रॉब्लम है , लेकिन केवल स्वास्थ्य का मामला होता तो वो संसद का सत्र शुरू होने के पहले इस्तीफा दे सकते थे. कुल मिलाकर जगदीप धनखड़ के इस्तीफे ने अनेक सवाल खड़े कर दिए हैं ! हालांकि मंगलवार की सुबह राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू में उनके इस्तीफा को मंजूर कर लिया है.जगदीप धनखड़ की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से व्यक्तिगत ट्यूनिंग काफी अच्छी थी. इसी ट्यूनिंग के चलते उन्हें उपराष्ट्रपति पद के लिए योग्य समझा गया था. जाहिर है जगदीप धनखड़ का उपराष्ट्रपति पद से अचानक इस्तीफा देश की राजनीति में हलचल मचाने वाला कदम है. स्वास्थ्य कारणों का हवाला देकर दिया गया यह त्यागपत्र ऐसे समय आया है जब संसद का मानसून सत्र पूरी रफ्तार पर है. महज़ 24 घंटे पहले तक वे राज्यसभा में कार्यवाही का संचालन कर रहे थे. ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या मामला केवल सेहत का है या इसके पीछे कोई राजनीतिक पटकथा लिखी जा रही है ? हालांकि, व्यक्तिगत स्वास्थ्य को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता. यदि धनखड़ वास्तव में किसी गंभीर स्वास्थ्य समस्या से जूझ रहे हैं, तो उनके निर्णय का सम्मान किया जाना चाहिए.प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अन्य नेताओं ने उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की है, जो स्थिति की गंभीरता को संकेत देती है.

लेकिन राजनीति में संयोग अक्सर संकेतों से भरे होते हैं. विपक्ष इस इस्तीफे को केवल स्वास्थ्य कारणों से जोडक़र नहीं देख रहा. कांग्रेस और अन्य दलों ने आरोप लगाया है कि यह कदम किसी बड़े राजनीतिक समीकरण, सरकार और उच्च सदन के बीच बदलते रिश्तों, या फिर आने वाले समय में किसी रणनीतिक कदम का हिस्सा हो सकता है. यह संदेह इसलिए भी गहरा है क्योंकि धनखड़ का कार्यकाल अभी दो साल से अधिक बचा था और वे राज्यसभा में सक्रिय, कई बार आक्रामक भूमिका निभा रहे थे. विपक्ष के साथ उनके तीखे संवादों ने हाल के सत्रों में खूब सुर्खियां बटोरी थीं.

इतिहास पर नज़र डालें तो यह तीसरा मौका है जब किसी उपराष्ट्रपति ने कार्यकाल पूरा होने से पहले पद छोड़ा है. वी.वी. गिरी और आर. वेंकटरमन ने राष्ट्रपति चुनाव लडऩे के लिए इस्तीफा दिया था. जगदीप धनखड़ का मामला अलग है क्योंकि उन्होंने स्वास्थ्य का कारण बताया है. अब सवाल यह है कि आगे क्या ? दरअसल, संविधान के अनुच्छेद 68 के अनुसार, उपराष्ट्रपति पद पर रिक्ति होने पर छह माह के भीतर चुनाव अनिवार्य है. राज्यसभा के सभापति का पद भी खाली हो गया है, जिसे फिलहाल उपसभापति हरिवंश संभालेंगे. लेकिन असली जंग उस समय दिखेगी जब सत्ता पक्ष इस पद के लिए नया चेहरा चुनने की रणनीति बनाएगा.क्या यह फैसला आने वाले राष्ट्रपति चुनाव के समीकरणों को प्रभावित करेगा? क्या यह किसी बड़े बदलाव का संकेत है ? सियासत में सवालों से ज्यादा जवाब कभी नहीं होते.फिलहाल इतना तय है कि जगदीप धनखड़ का यह कदम भारतीय राजनीति के पन्नों पर एक नया अध्याय जोड़ चुका है. स्वास्थ्य हो या सियासत, इसकी गूंज लंबे समय तक सुनाई देगी.

 

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