उज्जैन: श्री सिंथेटिक कंपनी 20 साल पहले जनवरी, 2006 में बंद कर दी गई, उसमें काम करने वाले हजारों श्रमिकों का पारिश्रमिक अब तक बकाया है. मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव से लेकर कलेक्टर रोशन कुमार सिंह से अब गुहार लगाई जा रही है.फैक्ट्री को पुनः चालू करने से लेकर लगभग 30 करोड़ का बकाय पारिश्रमिक प्राप्त करने के लिए विभिन्न कोर्ट में कर्मचारी संगठनों द्वारा लड़ाई लड़ी जा रही है. हालत यह है कि न तो अब तक पारिश्रमिक मिल पाया है न कंपनी पुनः चालू होने के आसार है. अब श्री सिंथेटिक के मजदूर और उनके परिजन मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव से मदद की गुहार लगा रहे हैं.
वेतन ग्रेच्युटी आदि बाकी
श्री सिंथेटिक में काम करने वाले कर्मचारियों को ग्रेज्युटी, कंपनसेशन,12 महीने के वेतन सहित करीब 30 करोड़ रुपए लेना बाकी है. श्री सिंथेटिक्स की जमीन का वेल्यूवेशन 5 साल पहले करवाया गया था तो इसकी कीमत 13 करोड़ रुपए सामने आई थी.
मरने के पहले मिल जाए पैसा तो अच्छी बात
मैंने वर्षों तक श्री सिंथेटिक्स कंपनी में काम किया, अपने परिवार का भरण पोषण किया, जब फैक्ट्री बंद हो गई तो इधर-उधर छुट्टी मजदूरी करने लगे. जब उज्जैन में काम नहीं मिला तो परिवार के साथ इंदौर शिफ्ट हो गया हूं लेकिन इस आस में उज्जैन आता जाता हूं कि मरने के पहले यदि बकाया पैसा मिल जाए तो परिवार के काम आएगा.
अशोक सिंह, पूर्व श्रमिक, श्री सिंथेटिक उज्जैन
