महिला उत्पीडऩ पर संवेदनशीलता दिखाएं

चुनाव चल रहे हैं इसका मतलब यह नहीं है कि प्रत्येक मुद्दे पर सियासत की जाए. कम से कम महिला उत्पीडऩ के मामले में राजनीतिक दलों को संवेदनशीलता दिखाने की आवश्यकता है. इन मुद्दों पर सियासत नहीं होनी चाहिए. कर्नाटक में जनता दल सेक्यूलर के नेता और पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा के पुत्र प्रज्वल रेवन्ना के खिलाफ दुष्कर्म के गंभीर आरोप लगे हैं. प्रज्वल कर्नाटक की हासन सीट से राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के प्रत्याशी हैं. हासन में चुनाव निपट चुका है. चुनाव समाप्त होते ही प्रज्वल जर्मनी चले गए. शनिवार को प्रज्वल के पिता एचडी रेवन्ना को अपहरण के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया. इस पूरे मामले में जमकर सियासत हो रही है. इसके पहले समय पश्चिम बंगाल के संदेश खाली का मामला भी सामने आया था. मणिपुर के महिला उत्पीडऩ को लेकर भी देश भर में खूब शोर शराबा हुआ. इन सभी मामलों को देखकर लगता है कि शासन और प्रशासन ने जिस तत्परता और कठोरता के साथ आरोपियों पर कार्रवाई करनी चाहिए थी वैसी नहीं हुई. कर्नाटक के प्रज्वल रेवन्ना के मामले में आरोप है कि कर्नाटक सरकार ने जानबूझकर देर से कार्रवाई की ताकि राज्य के वोक्कलिंगा मतदाताओं पर विपरीत असर न पड़े. पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा का परिवार इसी समुदाय से आता है. इस मामले में कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डी शिव कुमार पर भी आरोप लग रहे हैं जो वोक्कलिंगा समुदाय के ही हैं. मणिपुर में भी वहां की भाजपा सरकार पर पक्षपात और लापरवाही के आरोप लग रहे हैं. संदेश खाली के मामले में तो पूरे देश ने देखा कि किस तरह से पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मुख्य आरोपी शाहजहां शेख को बचाने के लिए सभी हथकंडे अपनाएं. जाहिर है राजनीतिक दल महिला उत्पीडऩ के मामले में बिल्कुल भी संवेदनशील नहीं हैं. जहां तक कर्नाटक के मामले का प्रश्न है तो भारत का यह दुर्भाग्य है कि राजनीति में कई क्षत्रप परिवारों से ऐसा नेता भी सामने आए हैं जिन्होंने सत्तामद में चूर होकर तमाम नैतिकताओं व मर्यादाओं को ताक पर रखा दिया है. पिछले दिनों कर्नाटक में हासन सीट से जनता दल (सेक्यूलर) के सांसद प्रज्वल रेवन्ना पर सैकड़ों महिलाओं के साथ दुराचार के जो गंभीर आरोप लगे, उसने राजनीति में पतन की पराकाष्ठा को दर्शाया है. पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा के पौत्र और पूर्व मंत्री एचडी रेवन्ना के पुत्र प्रज्वल के यौन उत्पीडऩ व दुराचार दर्शाते करीब तीन हजार वीडियो सार्वजनिक हुए.चुनाव प्रचार के दौरान वीडियो पेन ड्राइव के जरिये बांटे जाते रहे.एक साल पहले भाजपा नेतृत्व को पत्र लिखकर चेताया था कि प्रज्वल के कुकृत्यों की पेन ड्राइव कांग्रेस के पास पहुंच चुकी है.जिसका उपयोग लोकसभा चुनाव में हथियार के रूप में किया जाएगा.सवाल भाजपा नेतृत्व पर भी है कि हकीकत से वाकिफ होने के बावजूद क्यों प्रज्वल रेवन्ना को गठबंधन के सहयोगी कोटे से टिकट दिया गया? इसी तरह जब राज्य में कांग्रेस की सरकार है तो एक साल पहले जानकारी होने के बावजूद प्रज्वल रेवन्ना के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की गई? दरअसल, वोक्कलिंगा समुदाय पर एचडी देवगौड़ा परिवार की पकड़ होने की वजह से भाजपा व कांग्रेस कड़ी कार्रवाई से बचते रहे हैं.कर्नाटक में पूर्व प्रधानमंत्री के परिवार के सदस्य व सांसद ने जो कुकृत्य किये हैं, उससे भारतीय लोकतंत्र शर्मसार हुआ है. मणिपुर, संदेश खाली और कर्नाटक की घटनाएं बताती है कि पुलिस और प्रशासन किस तरह से सत्तारूढ़ दल के नेताओं के दबाव में काम करते हैं. ऐसी घटनाएं सिर्फ मणिपुर, पश्चिम बंगाल या कर्नाटक में नहीं हो रही है, बल्कि महिला उत्पीडऩ पूरे देश की समस्या है. वैसे अनेक राज्यों ने महिला उत्पीडऩ रोकने के लिए कड़े कानून बनाएं हैं. लेकिन जब मामला सत्तारूढ़ दल के नेताओं से जुड़ा होता है तो पुलिस और प्रशासन पूरी तरह से विफल साबित होते हैं. जाहिर है ऐसे मामलों पर जिस तत्परता और कड़ाई से करवाई की जानी चाहिए वैसे नहीं होती.

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