उज्जैन:मात्र 3 साल महाकुंभ के आयोजन में शेष बचे हैं, ऐसे में मध्य प्रदेश सरकार कोई भी कोताही बरतना नहीं चाहती है. पिछली बार के सिंहस्थ 2016 में जिन अफसरों ने प्रमुख भूमिका का निर्वहन करते हुए आयोजन को बेहतर तरीके से संपन्न कराया था उनमें से प्रमुख अफसरों को पुनः उज्जैन लाकर कुंभ की कमान दी जाएगी.
सिंहस्थ मेला प्राधिकरण का नए सिरे से गठन किया जा रहा है.नवभारत को मिली जानकारी के अनुसार मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव महाकाल की नगरी में महाकुंभ का आयोजन निर्बाध तौर पर संपन्न करना चाहते हैं. ऐसे में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सिंहस्थ मेला प्राधिकरण के पुनर्गठन का प्लान बनाया है.
पुराने अफसरों का खँगाल रहे डाटा
2016 में जो अधिकारी उज्जैन में पदस्थ रहे हैं, जिन्होंने सिंहस्थ की योजनाओं का बेहतर तरीके से क्रियान्वन किया है, ऐसे उज्जैन के सभी सरकारी विभागों का डाटा निकाला जा रहा है कि कौन अधिकारी किस डिपार्टमेंट में कितने समय तक किस पोस्ट पर पदस्थ रहा, उनकी कैसी कार्य प्रणाली थी और अभी वह कहां पदस्थ हैं.
मुख्य सचिव और प्रमुख सचिव कर रहे हैं मॉनीटरिंग
प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव अनुराग जैन से लेकर अपर सचिव राजेश राजौरा एवं प्रमुख सचिव राघवेंद्र सिंह से लेकर चंद्रमौली शुक्ला तक उज्जैन सिंहस्थ को लेकर लगातार मॉनिटरिंग कर रहे हैं. कभी उज्जैन आकर बैठक लेते हैं तो कभी फोन पर फीडबैक लेकर कार्य प्रणाली समझ रहे हैं.
मौजूदा अफसर नहीं उठा सकते जिम्मा
भोपाल के जो वरिष्ठ अफसर उज्जैन जिला प्रशासन को 2 साल का समय सिंहस्थ के कार्यों के लिए डेट लाइन के तौर पर दे चुके हैं, उन्होंने धरातल पर आकलन किया तो लगा कि मौजूदा अफसर आगामी सिंहस्थ का जिम्मा नहीं उठा सकते, ऐसे में उज्जैन से लेकर भोपाल तक नए सिरे से अफसरों की तैनाती सिंहस्थ के तहत करने का प्लान बनाया जा रहा है.
सिंहस्थ मेला प्राधिकरण का होगा गठन, बनेगा अध्यक्ष
नवभारत को मिली जानकारी के अनुसार पिछले सिंहस्थ 2016 में सिंहस्थ मेला प्राधिकरण का गठन किया गया था, उस वक्त न कार्यालय था न अध्य्क्ष को चार पहिया वाहन दिया था. उस दौरान भाजपा के वरिष्ठ नेता दिवाकर नातू को अध्यक्ष बनाकर राज्य मंत्री का दर्जा दिया गया था, जैसे-जैसे सिंहस्थ पास आता गया, वैसे-वैसे व्यवस्था की गई. 6 करोड़ की लागत से विकास प्राधिकरण ने सिंहस्थ मेला प्राधिकरण का निर्माण किया और एक वाहन भी अध्यक्ष नातू को तब दिया गया था, अब सिंहस्थ मेला प्राधिकरण का नए सिरे गठन किया जाएगा जिसमें किसी एक नेता या अफसर को अध्यक्ष भी नियुक्त किया जाएगा.
